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गीता अध्याय 1 श्लोक 33 | अर्जुन की दुविधा का गहरा अर्थ | Bhagavad Gita Explanation in Hindi क्यों नहीं चाहता अर्जुन विजय? | गीता अध्याय 1 श्लोक 33 की सरल व्याख्या इस वीडियो में हम श्रीमद्भगवद्गीता के पहले अध्याय के 33वें श्लोक का गहराई से अर्थ समझेंगे। कुरुक्षेत्र की रणभूमि में अर्जुन अपने ही गुरुजनों, भाईयों और संबंधियों को देखकर युद्ध से पीछे हटने लगते हैं। अर्जुन कहते हैं कि उन्हें ऐसा राज्य, सुख या विजय नहीं चाहिए जिसकी कीमत अपनों का जीवन हो। यह श्लोक केवल महाभारत की कथा नहीं, बल्कि हर उस मनुष्य की दुविधा है जो कर्तव्य और भावना के बीच फँस जाता है। इस वीडियो में आप जानेंगे— ✔ अर्जुन का मानसिक संघर्ष ✔ कर्तव्य और मोह का अंतर ✔ गीता का वास्तविक संदेश ✔ आज के जीवन में इस श्लोक की सीख यह वीडियो उन सभी के लिए है जो गीता को सरल हिंदी में, गहराई से समझना चाहते हैं। 🙏 वीडियो को लाइक करें 📌 चैनल को सब्सक्राइब करें 🔔 गीता ज्ञान के लिए बेल आइकन दबाएँ