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बंसत पंचमी पर बाबा विश्वनाथ के तिलकोत्सव के अवसर पर एक बार पुन: काशीपुराधिश्वर की चरण सेवा का अवसर प्राप्त हुआ। बसंत पंचमी केवल ऋतु परिवर्तन का पर्व नहीं है, बल्कि यह बाबा विश्वनाथ के सगुन और मांगलिक अनुष्ठानों की शुरुआत का प्रतीक है। टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास पर संपन्न होने वाला यह तिलकोत्सव काशी की विशिष्ट परंपरा है, जिसमें बाबा विश्वनाथ की पंचबदन चल प्रतिमा को विशेष रूप से सुसज्जित कर वैदिक विधि-विधान के साथ तिलक करना हमारी सनातनी और पौराणिक मान्यताओं के साथ काशी की सांस्कृतिक विरासत और लोकआस्था का जीवंत उदाहरण भी है। इसमें न केवल मंदिरों और महंत परिवारों की भूमिका होती है, बल्कि आम काशीवासी भी पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ इस लोकाचार में भाग लेते हैं। बसंत पंचमी (शुक्रवार) को पहली बार दशाश्वमेध स्थित सिद्धपीठ बड़ी शीतला माता मंदिर के श्रीमहंत लिंगिया महाराज शिवप्रसाद जी ने काशीपुराधीश्वर बाबा विश्वनाथ का तिलकोत्सव चढाया। बांसफाटक स्थित श्रीयंत्र पीठम से लिंगिया महाराज के नेतृत्व में 21 वैदिक बटुकों के मंत्रोच्चार के साथ शहनाई की धुन डमरूओं के निनाद और शंख ध्वनी के साथ 51 थालों में बाबा के तिलक का चढ़ावा व 56 भोग की थाली लिये काशीवासी तिलकहरु भक्त हर हर महादेव का उद्घोष करते हुये टेढ़ीनीम महंत आवास पहुचे। टेढ़ीनीम महंत आवास पर विश्वनाथ मंदिर के महंत वाचस्पती तिवारी ने लिंगिया महाराज के साथ संयुक्त रुप से तिलकोत्सव की परंपरा का लोकाचार पुरा किया।