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IMAAN NEWS 10th February 2026 फलसफा-ए-हयात… एक नई सुबह की आहट Philosophy of Life… The Sound of a New Dawn #sayedasifjah #imaannews #BaatImaanKi_BaatInsaanKi #news #muslimnews #insaniyat #peace #GenZRevolution #AlcoholFreeLife #SoberLife #HealthIsWealth #NewWorld #MuslimPerspective #IslamicLifestyle #FitnessFirst #NoAlcohol #MindfulLiving #YouthPower #EndofAddiction #GenZHealth #IslamicPrinciples #HistoricalScams #AddictionAndHealth #ConsciousGenZ “बात ईमान की… बात इंसान की।” कहते हैं कि वक्त जब करवट लेता है, तो बड़े-बड़े बुत ढह जाते हैं। पिछले कुछ बरसों से दुनिया-ए-सिनेमा, फैशन और बाज़ार पर नज़र रखने वाले experts एक अजीब-ओ-गरीब मगर निहायत ही मसर्रत-बख़्श बदलाव देख रहे हैं। सरमायादारी (Capitalism) और मुनाफ़ाखोरी की हवस ने हमेशा इंसानियत की सेहत के साथ खिलवाड़ किया है। बड़ी कंपनियों ने अक्सर ज़हर को 'शहद' बनाकर बेचा है। कभी दौर था जब हाथ में जाम और महफ़िल में मदहोशी को 'तहरीक-ए-नौजवानी' (युवा होने की निशानी) समझा जाता था, लेकिन आज की नई नस्ल, जिसे हम 'जेन-जी' कहते हैं, ने रिवायतों का रुख ही बदल दिया है। ताज़ा तरीन रिपोर्टों के मुताबिक, दुनिया भर की शराब सनअत (alcohol industry) को पिछले चार सालों में तकरीबन ₹75 लाख करोड़ का ज़बरदस्त नुकसान उठाना पड़ा है। यह महज़ एक मशीनी आंकड़ा नहीं है, बल्कि एक मुकम्मल इंकलाब (reforms) की दास्तान है। मुस्लिम नुक्ता-ए-नज़र (Muslim perspective) से देखें तो यह खबर किसी नेमत से कम नहीं मालूम होती। इंसानी तारीख गवाह है कि जब भी किसी चीज़ में अंधा मुनाफ़ा नज़र आया, तो बड़ी कंपनियों ने इंसान की सेहत को दांव पर लगाने में कभी झिझक महसूस नहीं की। आज हम जिस दौर में जी रहे हैं, वहां 'जेन-जी' (Gen Z) के ज़रिए शराब की सनअत (Alcohol Industry) को पहुँचाया गया नुकसान महज़ एक इत्तेफाक नहीं है। यह उस 'मार्केटिंग के जाल' की हार है, जिसने सदियों से इंसान को नशे और लत का आदी बनाकर अपनी तिजोरियाँ भरी हैं। मुनाफ़ा कमाने की इस हवस ने हमेशा इंसानी कमज़ोरियों का फायदा उठाया है। अगर हम तारीख के पन्ने पलटें, तो पाएंगे कि जो चीज़ें आज जानलेवा मानी जाती हैं, उन्हें कभी 'सेहत का ज़ामिन' (Health Enhancer) बताकर बेचा गया था। मिसाल के तौर पर, तंबाकू (Tobacco) की शुरुआत को ही देख लीजिए। पुराने ज़माने के अखबारात ऐसे विज्ञापनों से भरे पड़े थे जिनमें दावा किया जाता था कि तंबाकू फेफड़ों के लिए मुफीद है और डॉक्टर इसे तनाव कम करने के लिए खुद इस्तेमाल करते हैं। आज हम जानते हैं कि यह सफेद झूठ था, जिसने करोड़ों जिंदगियां निगल लीं। इसी तरह चाय (Tea) का किस्सा भी बड़ा दिलचस्प है। एक दौर था जब दुनिया चाय से नावाकिफ थी, लेकिन औपनिवेशिक ताकतों (Colonial Powers) ने इसे एक 'जादुई ड्रिंक' की तरह पेश किया। मुफ्त नमूनों और ज़बरदस्त प्रचार के ज़रिए देखते ही देखते पूरी दुनिया को इसका ऐसा असीर (Addict) बना दिया गया कि आज यह सुबह की पहली ज़रूरत बन चुकी है। यही फॉर्मूला शराब की सनअत ने भी अपनाया। इसे कभी 'शाही ठाट-बाट' से जोड़ा गया, तो कभी इसे 'मॉडर्निटी' और 'सोशल स्टेटस' का नाम देकर नौजवानों के ज़हन में उतारा गया। लेकिन शुक्र है कि आज की नस्ल इस 'मुनाफ़ाखोरी के खेल' को समझ चुकी है। आज का नौजवान यानी 'जेन-जी' पुराने दौर की उन भेड़-चालों से बाहर निकल रहा है। वह अब टीवी या सोशल मीडिया के विज्ञापनों के बहकावे में आने के बजाय अपनी अक्ल और ज़मीर की आवाज़ सुन रहा है। मुस्लिम नुक्ता-ए-नज़र (Muslim Perspective) से देखें तो यह एक बहुत बड़ा रूहानी बदलाव है। इस्लाम ने चौदह सौ साल पहले ही आगाह कर दिया था कि 'खम्र' (नशा) तमाम बुराइयों की जड़ है। हदीस-ए-मुबारका में आता है कि "जिस चीज़ की ज़्यादा मिकदार (Quantity) नशा पैदा करे, उसकी कम मिकदार भी हराम है।" आज की नस्ल, चाहे वह किसी भी मज़हब की हो, अनजाने में इसी 'फितरती सच्चाई' (Natural Truth) को गले लगा रही है कि तंबाकू, चाय और शराब के ज़रिए जो 'लत की जंजीरें' बाज़ार ने हमारे समाज को पहनाई थीं, नई नस्ल ने उन्हें तोड़ना शुरू कर दिया है। यह एक ज़हनियत की जीत है। अब नौजवानों को बेवकूफ बनाकर ज़हर बेचना मुमकिन नहीं रहा। वे अपनी 'जिस्मानी अमानत' (Body as a Trust) की हिफाज़त करना सीख गए हैं। बाज़ार को पहुँचाया गया यह खरबों का घाटा दरअसल इंसानियत की सेहत का वह मुनाफा है, जिसकी दुआएं सदियों से मसाजिद और इबादतगाहों में मांगी जा रही थीं। यकीनन, यह दौर एक ऐसी मुकद्दस बेदारी का है जहाँ इंसान 'मशीनी लत' से निकलकर 'हकीकी होश' की तरफ लौट रहा है। यह वह सच्चाई है जिसकी आज हमारे बीमार समाज को ऑक्सीजन की तरह ज़रूरत है। मुस्लिम समाज के लिए यह एक बेहतरीन मौका है कि वे अपनी रिवायती 'तौहीद' और 'पाकीजगी' के पैगाम को इस नई नस्ल के साथ जोड़ें। हमें खुशी होनी चाहिए कि दुनिया उस रास्ते पर चल पड़ी है, जो सीधा, साफ और नफ़ासत से भरपूर है। 'जेन-जी' ने दुनिया को दिखा दिया है कि 'होश' में रहना ही सबसे बड़ा 'जोश' है। …………++++………… Sayed Asif Jah, a Bold Voice in Journalism: A new YouTube channel has been launched on 1st August 2025, with a distinct mission, to present current news with a Muslim perspective. At the helm of this initiative is veteran journalist Sayed Asif Jah, a respected name in Indian media, who has served for decades in leading newspapers, magazines, and TV news channels across Hindi, English, and Urdu. He has served 'TVI', India's first news channel as Mumbai head to name a few. This is not just a news channel, it’s a movement of media inclusivity, led by a journalist who understands the responsibility that comes with the camera and the mic.