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गाजर और बैंगन की खेती || अधिक उत्पादन अधिक पैसा|| carrot || #farming 🟢 बैंगन की खेती (Brinjal Farming) 🌱 जलवायु व मिट्टी बैंगन गर्म और नम जलवायु में अच्छा होता है। दोमट व उपजाऊ मिट्टी सबसे उपयुक्त रहती है। मिट्टी का pH: 6 से 7.5 🌾 बुवाई का समय फरवरी–मार्च (गर्मी की फसल) जून–जुलाई (बरसात की फसल) अक्टूबर–नवंबर (सर्दी की फसल) 🌿 पौध तैयार करना पहले नर्सरी में बीज बोएँ। 25–30 दिन बाद पौध खेत में लगाएँ। 💧 सिंचाई 7–10 दिन में एक बार सिंचाई करें। गर्मी में ज्यादा पानी दें। 🌼 खाद व उर्वरक गोबर की खाद: 15–20 टन/हेक्टेयर यूरिया, डीएपी, पोटाश संतुलित मात्रा में दें। 🐛 कीट व रोग फल व तना छेदक, माहू प्रमुख कीट हैं। नीम तेल या उचित दवा का प्रयोग करें। 🧺 उत्पादन 250–350 क्विंटल/हेक्टेयर तक उपज। 🟠 गाजर की खेती (Carrot Farming) 🌱 जलवायु व मिट्टी गाजर ठंडी जलवायु में अच्छी होती है। हल्की, भुरभुरी व रेतीली दोमट मिट्टी उपयुक्त। pH: 5.5 से 7 🌾 बुवाई का समय अगस्त–सितंबर (मैदानी क्षेत्र) सितंबर–अक्टूबर (उत्तरी भारत) 🌿 बुवाई विधि सीधे खेत में बीज बोएँ। कतार से कतार दूरी: 25–30 सेमी 💧 सिंचाई 5–7 दिन में हल्की सिंचाई। जलभराव से बचें। 🌼 खाद व उर्वरक गोबर की खाद: 10–15 टन/हेक्टेयर नाइट्रोजन व फास्फोरस आवश्यक। 🐛 कीट व रोग लीफ ब्लाइट, जड़ सड़न मुख्य रोग। फफूंदनाशक का समय पर प्रयोग करें। 🧺 उत्पादन 200–300 क्विंटल/हेक्टेयर तक उपज।