У нас вы можете посмотреть бесплатно The Great Surrender Effect! गैस-तेल के बड़े संकट में देश! आम जनता का निकलेगा तेल!! Umakant Lakhera или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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फारस की खाड़ी के जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ ) में ईरान की नाकेबंदी से भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने लगी है। इसी बीच सरकारी पत्रकारों के जरिए गोदी मीडिया में यह खबर प्लांट करवाई गई कि ईरान ने भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति की इजाज़त दे दी है। ये अफवाहें जब ब्रेकिंग न्यूज़ बनकर तेहरान पहुंचीं, तो ईरान ने आधिकारिक तौर पर साफ कर दिया कि भारत को इस तरह की कोई इजाज़त नहीं दी गई है। जरा सोचिए—जिस देश पर हमला होने से ठीक 24 घंटे पहले प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा हुई, अगर उसी समय इज़राइल को समझाया जाता कि वह ईरान पर हमला न करे, तो शायद हालात कुछ और होते। ईरान के सर्वोच्च नेता खामनेई की मृत्यु पर इस देश की ओर से दो शब्द शोक और सहानुभूति के भी नहीं निकले। ऐसे में इतनी जल्दी ईरान से रहम की उम्मीद पाल लेना किस हद तक यथार्थवादी है? सवाल यह है कि मनगढ़ंत कहानियां गढ़कर इतने बड़े देश में गैस और तेल संकट दूर करने का टोटका आखिर कब तक काम करेगा? दरअसल जमाखोरी और बाजार में पैनिक रोकने के लिए इस तरह के उपाय पहले भी अपनाए जाते रहे हैं, लेकिन इस बार सरकार देर तक सोई रही। वक्त रहते जमाखोरी रोकने के ठोस कदम नहीं उठाए गए। देश के विश्वविद्यालयों की कैंटीनों में LPG सप्लाई में बाधाएं बढ़ने लगी हैं। अगर यह संकट और गहराया तो भूखे-प्यासे छात्र हॉस्टल छोड़कर कहां जाएंगे? यह भी किसी से छिपा नहीं था कि पिछले एक साल से संकेत मिल रहे थे कि ईरान पर हमला हो सकता है, लेकिन खाड़ी संकट पर सरकार ने आंखें मूंदे रखीं। अगर भारत में होटल-रेस्टोरेंट चेन पर इसका असर पड़ा और वे बंद होने लगे, तो करोड़ों रोजगार खतरे में पड़ जाएंगे। रूस से ईंधन आपूर्ति रुकने से संकट और गहरा गया है। विपक्ष का आरोप है कि अमेरिका के आगे मोदी सरकार के “सरेंडर” ने इस संकट को और बढ़ा दिया। विपक्ष का कहना है कि सरकार जिम्मेदारी और जवाबदेही से बचने के लिए बहाने बना रही है, जबकि वक्त रहते जमाखोरी रोकने और वैकल्पिक ऊर्जा आपूर्ति के कदम उठाए जाते तो हालात इतने गंभीर नहीं होते। जाने माने आर्थिक पत्रकार और PTI के संपादक रहे राजेश महापात्रा के साथ बातचीत के इस वीडियो को पूरा सुनिए—एक-एक शब्द बेहद महत्वपूर्ण है। The Iranian blockade in the Strait of Hormuz is disrupting India’s crude oil supplies. Claims in pro-government media that Iran allowed oil shipments were denied by Tehran. Critics say Narendra Modi’s government ignored warning signs, failed to curb hoarding, and worsened the crisis through policy choices. Listen to my conversation with economic journalist Rajesh Mahapatra, former editor of Press Trust of India. — Umakant Lakhera