У нас вы можете посмотреть бесплатно PART 19:-ल्हासा छोड़ते समय: दलाई लामा का मौन संदेश?डर के बीच आस्था: ल्हासा से अलविदा или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
एपिसोड–19 उस भावनात्मक और ऐतिहासिक क्षण को दर्ज करता है, जब समूह को ल्हासा से विदा लेनी पड़ती है। बदलते राजनीतिक हालात और चीनी सेना के दबाव के कारण एक साथ यात्रा संभव नहीं रहती; लोग छोटे-छोटे समूहों में, बिना शोर और बिना विद्रोह, मौन अनुशासन के साथ आगे बढ़ते हैं। यह विदाई केवल एक शहर से नहीं, बल्कि एक जीवन-दर्शन से अस्थायी दूरी का प्रतीक बन जाती है। इसी पृष्ठभूमि में तिब्बती समाज की अद्भुत मर्यादा और साहस दिखाई देता है। भय के वातावरण में भी उनकी आस्था बिखरती नहीं—वे जानते हैं कि सुरक्षा मौन में है और पहचान करुणा में। ऐसे समय में कुछ तिब्बती दलाई लामा से मिलने उनके व्यक्तिगत मंदिर तक पहुँचते हैं। यह मुलाक़ात औपचारिक नहीं, बल्कि आत्मीय है—जहाँ आँसू शब्दों से पहले बोलते हैं और आशीर्वाद राजनीति से ऊपर खड़ा दिखता है। यह अध्याय दिखाता है कि तिब्बती आस्था सत्ता-केंद्रित नहीं, करुणा-केंद्रित है। दलाई लामा का व्यक्तिगत मंदिर किसी भव्यता का प्रदर्शन नहीं करता; वहाँ सांत्वना, स्थिरता और नैतिक बल मिलता है। यही कारण है कि दबाव के दौर में भी तिब्बती समाज टूटता नहीं—वह भीतर से संगठित रहता है। ल्हासा को कहना गया “अलविदा” एक विराम है, अंत नहीं। यह विराम बताता है कि तीर्थ, मंदिर और नगर बदल सकते हैं, पर चेतना और स्मृति साथ चलती हैं। एपिसोड–19 इस सच्चाई को रेखांकित करता है कि जब रास्ते बिखरते हैं, तब मूल्य एकजुट होते हैं—और वही किसी सभ्यता की असली ताकत होती है।