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गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे: ड्रोन सर्वे और भूमि अधिग्रहण अपडेट गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे परियोजना अपने प्रारंभिक चरण में पहुंच गई है, जिसके तहत अधिकारियों ने ड्रोन के माध्यम से तकनीकी सर्वेक्षण और टोपोग्राफी मैपिंग का कार्य शुरू कर दिया है। लगभग 750 किलोमीटर लंबा यह मार्ग उत्तर प्रदेश और हरियाणा के 22 जिलों को आपस में जोड़कर कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगा। इस डिजिटल सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य मार्ग में आने वाले मकानों, नदियों और बिजली लाइनों का सटीक विवरण जुटाना है ताकि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को विवाद मुक्त बनाया जा सके। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि एक बार आधिकारिक गजट जारी होने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी जाएगी और नए निर्माणों के लिए कोई मुआवजा नहीं मिलेगा। इसके अतिरिक्त, सरकार पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के विस्तार और उसके किनारे सेमी बुलेट ट्रेन चलाने की संभावनाओं पर भी विचार कर रही है। फरवरी के अंत तक इस पूरे प्रोजेक्ट का डिजाइन तैयार होने की उम्मीद है, जिससे क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति मिलेगी। गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे से किन 22 जिलों को और कैसे लाभ होगा? ड्रोन सर्वे और डिजिटल मैपिंग से भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया कैसे बदलेगी? पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर सेमी बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की क्या योजना है? उपलब्ध स्रोतों के आधार पर गोरखपुर-पानीपत एक्सप्रेसवे से जुड़े 22 जिलों और उन्हें होने वाले लाभ/प्रभाव के बारे में जानकारी निम्नलिखित है: किन 22 जिलों को लाभ होगा? स्रोतों के अनुसार, यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कुल 22 जिलों को आपस में जोड़ेगा। हालाँकि, स्रोतों में सभी 22 जिलों की पूरी सूची नहीं दी गई है, लेकिन सर्वेक्षण और एलाइनमेंट के संदर्भ में निम्नलिखित स्थानों का विशेष उल्लेख किया गया है: गोरखपुर: यहाँ सदर तहसील (जिसमें 24 और 22 राजस्व गाँव शामिल हैं) और कैम्पियरगंज तहसील क्षेत्र का जिक्र है। कुशीनगर: यहाँ कप्तानगंज और हाटा क्षेत्रों (19 गाँव) का उल्लेख है। पानीपत: नाम के अनुसार यह एक्सप्रेसवे पानीपत (हरियाणा) तक जाएगा। कैसे लाभ होगा और क्या प्रभाव पड़ेगा? बेहतर कनेक्टिविटी: इस एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई बढ़कर लगभग 750 किलोमीटर होगी, जिससे उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बीच संपर्क सुगम होगा। विवाद रहित भूमि अधिग्रहण: ड्रोन तकनीक का उपयोग करके टोपोग्राफी (स्थलाकृति) और डिजिटल मैपिंग की जा रही है। इससे एलाइनमेंट के क्षेत्र में आने वाले मकान, नदी, और बिजली के रिकॉर्ड जुटाए जा रहे हैं, जिससे भूमि अधिग्रहण के दौरान विवादों की संभावना कम रहेगी। एलाइनमेंट और मुआवज़ा: एनएचएआई (NHAI) द्वारा सर्वेक्षण किया जा रहा है। एलाइनमेंट के दायरे में आने वाले पुराने निर्माणों और जमीन के लिए अधिग्रहण की योजना बनाई जाएगी। ध्यान दें: स्रोतों में यह चेतावनी दी गई है कि एलाइनमेंट तय होने और गजट प्रकाशन के बाद, दायरे में आने वाले क्षेत्र में नया निर्माण करने वालों को मुआवजा नहीं दिया जाएगा और जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी जाएगी। इस परियोजना का डिजाइन फरवरी तक तैयार होने की उम्मीद है और एलाइनमेंट का काम तेजी से चल रहा है। #indiainfrastructure #delhimumbaiexpressway #infrastructureindia #infrastructureindia #abcd2day #abcdtoday #expressway #expertrp #rpkumawaterolav #greenfieldexpressway #GorakhpurPanipatExpressway #गोरखपुरपानीपतएक्सप्रेसवे #ExpresswayNews #UttarPradeshHighway #HaryanaInfrastructure #DroneSurvey #ड्रोनसर्वेक्षण #TopographyMapping #भूमि_अधिग्रहण #LandAcquisition #पूर्वांचलएक्सप्रेसवे #SemiBulletTrain #सेमिबुलेटट्रेन #UPExpressway #750kmExpressway #InfrastructureDevelopment #भारतीयएक्सप्रेसवे #GovernmentProjects #NHAIProjects #UPEconomy #HighwayConnect #22DistrictsConnect #LatestInfrastructure #ExpresswayUpdate2026 #IndiaHighways