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06.05.2017 - 19वीं शताब्दी में औद्योगीकरण अपने साथ मौलिक परिवर्तन लेकर आया. देखते ही देखते तेजी के साथ समाज के सभी क्षेत्रों की दुनिया भर की सूचनाओं और समाचारों तक पहुंच हो गयी. लेकिन जैसे-जैसे शहरी आबादी बढ़ी, शोषण और अन्याय के नए रूप सामने आए. दान जैसे पारंपरिक ईसाई मूल्यों का औद्योगिक युग में क्या हुआ? क्या बेलगाम पूंजीवाद और न्याय एक साथ रह सकते हैं? और दुनिया की पहली वैश्विक समाचार एजेंसी ने दुनिया और हमारे मूल्यों को देखने के तरीके को कैसे प्रभावित किया? ये सवाल हमारी श्रृंखला "रिइन्वेंटिंग द वर्ल्ड" के चौथे एपिसोड में हैं. 19वीं सदी को रॉयटर्स समाचार एजेंसी के संस्थापक पॉल जूलियस रॉयटर जैसे उद्यमियों ने आकार दिया था. इस बीच फ्रेडरिक एंगेल्स, जो एक उद्यमी के बेटे थे, बड़े होकर पूंजीवाद के कड़े आलोचक बने. एंगेल्स के 200 साल बाद, बर्लिन के उद्यमी डेविड डायलो ने टिकाऊ आर्थिक रणनीतियों के बारे में एक ऑनलाइन पत्रिका की स्थापना की. हम एक युवा अमरीकी, शेपर्ड पेपर से भी मिले, जो पेरिस में रहते हैं और एक फोटोग्राफर के रूप में काम करते हैं . डायलो और पेपर, दोनों अलग-अलग तरीकों से इस सवाल का जवाब तलाशते हैं कि दुनिया को एक निष्पक्ष जगह कैसे बनाया जा सकता है? व्यापार और राजनीति में आदर्शों और वास्तविकता के बीच इतना अंतर क्यों है? और हर इंसान की समाज के प्रति कितनी जिम्मेदारी है? #DWDocumentaryहिन्दी #DWहिन्दी #गरीबी #पूंजीवाद ------------------------------------------------ अगर आपको वीडियो पसंद आया और आगे भी ऐसी दिलचस्प वीडियो देखना चाहते हैं तो हमें सब्सक्राइब करना मत भूलिए. विज्ञान, तकनीक, सेहत और पर्यावरण से जुड़े वीडियो देखने के लिए हमारे चैनल DW हिन्दी को फॉलो करे: @ और डॉयचे वेले की सोशल मीडिया नेटिकेट नीतियों को यहां पढ़ें: https://p.dw.com/p/MF1G