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नकारात्मक बॉडी टॉक का मतलब है अपने शरीर के बारे में बुरा बोलना या सोचना — जैसे: “मैं बहुत मोटी/पतली हूँ” “मेरी शक्ल अच्छी नहीं है” “मेरा रंग/कद अच्छा नहीं है” बार-बार अपने शरीर की तुलना दूसरों से करना यह बात हम खुद से भी कह सकते हैं (self-talk) और दूसरों से भी। इसके प्रभाव आत्मसम्मान कम होना तनाव और चिंता बढ़ना डिप्रेशन का खतरा खाने-पीने की गलत आदतें या ईटिंग डिसऑर्डर सोशल मीडिया से प्रभावित होकर अपने शरीर से असंतोष लोग ऐसा क्यों करते हैं? समाज और मीडिया में “परफेक्ट बॉडी” का दबाव दूसरों से तुलना बचपन से मिली आलोचना सोशल मीडिया फिल्टर और एडिटेड तस्वीरें इससे कैसे बचें?1. अपनी सोच को पकड़ें और बदलें नकारात्मक विचार आए तो पूछें: 👉 “क्या मैं अपने दोस्त से भी ऐसे ही बोलता/बोलती?” फिर उसे सकारात्मक या तटस्थ वाक्य में बदलें। 2. शरीर की कार्यक्षमता पर ध्यान दें “मेरा शरीर कैसा दिखता है” से ज्यादा “मेरा शरीर क्या-क्या कर सकता है” पर ध्यान दें। 3. तुलना कम करें हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है — तुलना अक्सर गलत और अधूरी होती है। 4. सकारात्मक वातावरण चुनें ऐसे लोगों और कंटेंट से दूर रहें जो बॉडी-शेमिंग करते हों। 5. जरूरत हो तो मदद लें अगर नकारात्मक बॉडी टॉक आपकी मानसिक सेहत को प्रभावित कर रहा है, तो किसी काउंसलर या मनोवैज्ञानिक से बात करना फायदेमंद हो सकता है। अगर आप चाहें तो मैं यह भी बता सकता/सकती हूँ कि बच्चों या किशोरों में इसे कैसे संभालें रिश्तों में बॉडी शेमिंग से कैसे निपटें या खुद के लिए एक छोटा “पॉजिटिव सेल्फ-टॉक” अभ्यास कैसे शुरू करें 😊 You said: पॉस्को अधिनियम के बारे मे बताए ChatGPT said: Protection of Children from Sexual Offences Act (POCSO Act) के बारे में जानकारी पॉस्को अधिनियम, 2012 भारत में बच्चों को यौन शोषण, उत्पीड़न और अश्लील अपराधों से बचाने के लिए बनाया गया एक विशेष कानून है। यह कानून 18 वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों पर लागू होता है। मुख्य उद्देश्य बच्चों को यौन अपराधों से कानूनी सुरक्षा देना अपराधों की स्पष्ट परिभाषा तय करना त्वरित न्याय के लिए विशेष अदालतों की व्यवस्था करना बच्चे के हित और सम्मान की रक्षा करना प्रमुख प्रावधान1. अपराधों की श्रेणियाँ पॉस्को अधिनियम में निम्न प्रकार के अपराध शामिल हैं: यौन उत्पीड़न (Sexual Assault) गंभीर यौन उत्पीड़न (Aggravated Sexual Assault) (जब अपराधी पुलिसकर्मी, शिक्षक, रिश्तेदार आदि हो) यौन हमला (Penetrative Sexual Assault) बाल अश्लीलता (Child Pornography) 2. कठोर सज़ा सामान्य यौन अपराधों के लिए 3 से 5 वर्ष या अधिक की सज़ बच्चे का बयान घर या सुरक्षित स्थान पर लिया जा सकता है बयान लेते समय महिला पुलिस अधिकारी की प्राथमिकता बच्चे की पहचान को गोपनीय रखना अनिवार्य मुकदमे की सुनवाई इन-कैमरा (बंद अदालत) में 4. अनिवार्य रिपोर्टिंग यदि किसी को बच्चे के साथ यौन अपराध की जानकारी है, तो उसे पुलिस को सूचना देना कानूनी रूप से अनिवार्य है। सूचना न देने पर दंड का प्रावधान है। 2019 संशोधन की मुख्य बातें सज़ाओं को और कठोर किया गया बाल अश्लील सामग्री के संबंध में कड़े प्रावधान जोड़े गए कुछ मामलों में मृत्युदंड का प्रावधान शामिल किया गया निष्कर्ष पॉस्को अधिनियम बच्चों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत कानून है, जिसका उद्देश्य है कि बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराधों पर सख्ती से रोक लगे और पीड़ित को त्वरित न्याय मिले।