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दिव्य सत्संग: पूज्य बापूजी और श्री सुरेशानंदजी की प्रश्नोत्तरी - भाग २ (फरीदाबाद पूनम दर्शन सत्संग) सत्संग के कुछ मुख्य अंश: -------------------------------------------------- पूज्य बापूजी: धन, दौलत, यश, तप, व्रत, उपवास - इन सब से बढ़कर है भगवान का ध्यान.... और भगवान के ध्यान में बड़े में बड़ा विघ्न है - व्यर्थ का चिंतन... और व्यर्थ के चिंतन को भगाने के लिये बड़े में बड़ा सरल साधन है - हर एक दो मिनट में हरि ॐ का गुंजन करें.... इसमें चुप साधन पर पहुँच जायेगा...व्यर्थ चिंतन बंद होकर खुली आँख, चाहे बंद आँख, अथवा आकाश की तरफ निगाह, या गुरु के तरफ...नि:संकल्प ध्यान... भले एक-एक मिनट का लगे...बहुत भारी लाभ देता है... श्री सुरेशानंदजी: संत तुलसीदासजी ने कहा: राम कृपा करि चितवा जेहि, संत विशुद्ध मिलतेहिं तेहि | भगवान ने कृपा करके जिसकी तरफ देखा है, या जिसका कल्याण करना चाहा, उनको विशुद्ध संत, सच्चे संत के चरणों में पहुंचा दिया, उनकी मुलाक़ात करा दी... इस से गुरुदेव ने प्रश्न किया कि भगवान कब तक देखते रहते हैं, कहाँ से देखते हैं, कैसे देखते हैं, और देखते ही रहते हैं कि फिर खाते भी हैं, सोते भी हैं? देवशयनी एकादशी से लेकर देवजगी एकादशी तक भगवान विश्राम करते हैं (चतुर्मास में), तो कैसे देखते हैं? पूज्य बापूजी: ये प्रश्न था हमारा... अब उत्तर दो महाराज... भगवान चतुर्मास सोते हैं, तो फिर जो कुछ हेरा-फेरी करें तो छूट है...क्योंकि भगवान नहीं देखते हैं, सो गए तो... बोलते हैं चतुर्मास में तो साधना करो ज्यादा, ज्यादा फल होगा... हाँ, फिर,...क्या उत्तर है? आपने कहा कि गुरु क्रोध रहित हों, कामना रहित हों (ऐसा गुरुगीता में आया है), लेकिन हम तो देखते हैं कि गुरु क्रोध करते हैं... भगवान राम के गुरु वसिष्ठ ने क्रोध किया, विश्वामित्र ने क्रोध किया, तो ऐसे कहाँ से गुरु खोजें जो क्रोध न करते हों ? शिवजी कहते हैं कि गुरु क्रोध-रहित होना चाहिए, लेकिन ऐसे ऊँचे गुरुओं में भी क्रोध तो देखा जाता है... और तुम जिसको गुरु मानते हो, वो तुम्हारे बापू भी क्रोध करते ही हैं...और काम है, तभी तो बेटा-बेटी किये... तो कहाँ से लायें काम रहित, क्रोध रहित गुरूजी ? ये तुम्हारे (साधकों के) तरफ से मैं सवाल कर रहा हूँ, ठीक है कि नहीं? बराबर पकड़े हैं अब महाराज (सुरेशानंदजी) को... देवताओं में श्रेष्ठ कौन है? नदियों में श्रेष्ठ कौन है? सम्पूर्ण स्त्रियों में श्रेष्ठ कौन है? लाभों में सबसे श्रेष्ठ लाभ क्या है? पुण्यों में सबसे बड़ा पुण्य क्या है? मन्त्रों में सबसे श्रेष्ठ मन्त्र कौन सा है? और चिंतन में सबसे श्रेष्ठ चिंतन क्या है? शुद्धियों में सबसे ऊँची शुद्धि क्या है? दानों में उत्तम दान क्या है? छोटी-छोटी बात में दुखी कौन रहता है? जो अपने सुख-दुःख का देने वाला दुसरे को मानता है... को काहू को नहीं सुख दुःख करि दाता... कोई किसी को सुख दुःख नहीं दे सकता है...अपनी बेवकूफी से ही हम दूसरों पर दोषारोपण करते हैं... -------------------------------------------------- (Sant Shri Asaram Ji Bapu: Faridabad Poonam Darshan Satsang) Endearingly called 'Bapu ji'(Asaram Bapu Ji), His Holiness is a Self-Realized Saint from India. Pujya Asaram Bapu ji preaches the existence of One Supreme Conscious in every human being; be it Hindu, Muslim, Christian, Sikh or anyone else. For more information, please visit - www.ashram.org (Official Website) www.rishiprasad.org www.rishidarshan.org www.hariomgroup.org www.hariomlive.org