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द्वापर युग में जब अधर्म का भार असहनीय हो गया, तब धरती माता ने स्वयं ब्रह्मलोक में देवताओं से उद्धार की पुकार लगाई। मथुरा के राजा कंस के अत्याचार से धर्म क्षीण हो रहा था और भय प्रजा की नियति बन चुका था। आकाशवाणी ने भविष्यवाणी की थी कि देवकी का आठवाँ पुत्र कंस का अंत करेगा — और कंस ने इसे चुनौती मान, सात नवजात शिशुओं का क्रूर वध कर डाला। कारागार की अंधकारमयी कोठरी में देवकी–वसुदेव बेड़ियों में बँधे थे, किंतु उनके हृदय में विश्वास अडिग था। उसी विश्वास की तपस्या से अष्टमी की आधी रात, भाद्रपद की वर्षा और यमुना के गर्जन के बीच स्वयं नारायण ने पुत्र रूप में अवतार लिया। ताले स्वतः खुले, बेड़ियाँ स्वयं टूटीं, दीपक के स्थान पर दिव्य नील प्रकाश फैला, और शेषनाग ने छत्र बन बालक की रक्षा की। वसुदेवजी ने उस दिव्य शिशु को यमुना पार गोकुल पहुँचाया, जहाँ नंद–यशोदा के घर योगमाया ने कन्या रूप में जन्म लिया था। बालक कृष्ण को यशोदा की गोद में सौंपकर, वसुदेव योगमाया को कंस के भ्रम हेतु मथुरा ले आए। कंस जब कन्या का वध करने बढ़ा, तब योगमाया ने आकाश में प्रकट होकर उसके अंत की उद्घोषणा कर दी — “जिसे तू खोजता है, वह गोकुल पहुँच चुका है!” यह कथा केवल एक जन्म की नहीं, एक युग परिवर्तन की घोषणा है — धर्म की पुनर्स्थापना, प्रेम–भक्ति के आलोक, और उस अनंत लीला के आरंभ की, जिसने आगे चलकर गीता–ज्ञान, रास–रस और दुष्ट संहार द्वारा जगत का उद्धार किया। ✨ श्रीकृष्ण का जन्म भय का अंत और आनंद की शुरुआत था… मृत्यु का नहीं, लीला का प्रथम अध्याय था। 🔔 ऐसी ही पौराणिक कथाओं और रहस्यमयी लीला–गाथाओं के लिए चैनल को Subscribe करें।आकाशवाणी ने कंस के अंत की भविष्यवाणी क्यों की थी? देवकी के आठवें पुत्र को लेकर कंस इतना भयभीत क्यों था? कारागार में दीपक बुझे बिना नीलवर्ण प्रकाश कैसे फैल गया? शेषनाग ने वसुदेव के ऊपर छत्र क्यों धारण किया? यमुना का जल वसुदेव के लिए दो भागों में कैसे बँट गया? गोकुल में योगमाया का जन्म क्यों कराया गया था? कंस ने कन्या को शिला पर क्यों पटका, फिर क्या चमत्कार हुआ? नंद–यशोदा को कृष्ण पालन का सौभाग्य कैसे मिला? कृष्ण का जन्म केवल कंस के अंत के लिए था या किसी बड़ी लीला के लिए? द्वापर युग में धर्म की पुनर्स्थापना की आवश्यकता क्यों पड़ी? #KrishnaJanm #ShriKrishna #Janmashtami #KansVadh #Vasudev #Devaki #Gokul #NandLal #YogaMaya #DwaparYug #Bhakti #SanatanKatha