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नमस्ते दोस्तों 🙏 2026 के शुरुआत में ही भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है — जापान को पीछे छोड़ते हुए भारत की GDP 4.18 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुँच चुकी है। लेकिन सवाल यह है — क्या यह उपलब्धि हर आम भारतीय के जीवन में दिखाई देती है? इस विशेष वीडियो में हम भारत की अर्थव्यवस्था को एक बिल्कुल अलग दृष्टिकोण से देखते हैं — गोस्वामी तुलसीदास जी की “रामचरितमानस” की दोहा-चौपाई शैली में रचित एक आधुनिक “आर्थिक आख्यान” के रूप में। यह कोई साधारण कविता नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक यात्रा की एक गहरी, संतुलित और संवेदनशील समीक्षा है। इस वीडियो में हम सवाल उठाते हैं: 🔹 भारत चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना, पर प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) अब भी कम क्यों है? 🔹 ब्रिटेन को पीछे छोड़ने के बाद भी हमारा रुपया पाउंड और डॉलर के मुकाबले कमजोर क्यों है? 🔹 विदेशी निवेशक और पर्यटक भारत से दूरी क्यों बना रहे हैं? 🔹 एक तरफ GDP बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज की ज़रूरत क्यों पड़ रही है? कविता की पंक्तियाँ इन सवालों को बहुत सरल लेकिन गहरे शब्दों में रखती हैं: “जगत चकित भारत निरखि, चौथे पद की ओट। पर प्रजा दुःख में मग्न है, सहत महँगाई चोट॥” यह वीडियो भारत की आर्थिक चमक और आम आदमी की वास्तविक स्थिति — दोनों को एक साथ देखने की कोशिश है। न पक्षपात, न प्रचार — केवल एक ईमानदार दृष्टि। अगर आपको यह काव्यात्मक और वैचारिक प्रस्तुति पसंद आए तो: 👍 Like करें 🔁 Share करें 🔔 Subscribe करें और सबसे ज़रूरी — कमेंट में बताइए, आप इस विषय पर क्या सोचते हैं। क्या भारत की तरक्की आपको अपने जीवन में महसूस होती है?