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भक्ति में शक्ति प्रथम एपिसोड || आरती सोनी || बाबारामदेव समाधि स्थान रामदेवरा || बाबा रामदेव (रामदेव पीर) 14वीं सदी के एक प्रसिद्ध लोक देवता थे, जिनका जन्म विक्रम संवत 1409 (लगभग 1352 ईस्वी) में बाड़मेर के ऊंडू कश्मीर में राजपूत परिवार में हुआ। वे समानता के समर्थक थे और उन्होंने भेदभाव मिटाया। 33 वर्ष की अल्पायु में, उन्होंने जैसलमेर के पास रामदेवरा (रूणिचा) में जीवित समाधि ली, जो आज एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। बाबा रामदेव का इतिहास और रामदेवरा का महत्व: जन्म व परिवार: बाबा रामदेव जी के पिता तंवर ठाकुर अजमल जी और माता मेणादे थीं। इन्हें भगवान श्री कृष्ण का अवतार माना जाता है। अवतार व चमत्कार: किंवदंतियों के अनुसार, उन्होंने भैरव राक्षस का वध कर पोकरण के पास के क्षेत्र को मुक्त कराया था। सामाजिक सुधार: उन्होंने जात-पात, ऊँच-नीच के भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई और दलित समाज (मेघवाल समुदाय) के उत्थान के लिए काम किया। समाधि स्थल: राजस्थान के जैसलमेर जिले में रुणिचा (रामदेवरा) में उन्होंने समाधि ली। उनके समाधि स्थल को 'रामदेवरा मंदिर' कहा जाता है, जहाँ हर साल भाद्रपद शुक्ल द्वितीया से एकादशी तक बड़ा मेला लगता है। रामापीर: मुस्लिम समुदाय के लोग उन्हें 'रामसा पीर' के रूप में सम्मान देते हैं। रामदेवरा से जुड़ी प्रमुख जानकारी: स्थान: जैसलमेर, राजस्थान। समाधि वर्ष: विक्रम संवत 1442 (1385 ईस्वी)। प्रमुख आकर्षण: रामसरोवर, डालीबाई की समाधि (उनकी मुंहबोली बहन)। उनकी शिक्षाओं ने मानवता, समानता और प्रेम का संदेश दिया, और आज भी लाखों श्रद्धालु 'जय बाबा री' के साथ वहां दर्शन के लिए आते हैं।