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पथरोल काली मंदिर मधुपुर || क्यों दी जाती हैं भैंसे की बली 😱😱😱 || क्या है मुगल काल की घटना || पथरोल काली पथरोल काली मंदिर पथरोल काली मंदिर का इतिहास पथरोल काली मन्दिर मधुपुर देवघर पथरोल काली को क्यों कहा जाता है दक्षिणेश्वर काली #pathrol_kali#dakshineswarkalitemple#madhupur#deoghar • पथरोल काली मन्दिर के बारे में 👇 माँ पथरोल काली भारत के झारखंड राज्य के संथाल परगना संभाग के मधुपुर देवघर में स्थित है। यह मधुपुर टाउन से लगभग 7 किमी दूर है। मंदिर में देवी काली को समर्पित एक मंदिर है। यह मधुपुर के सबसे पुराने और पवित्र मंदिरों में से एक है जिसे राजा दिग्विजय सिंह ने लगभग 6 से 7 शताब्दी पहले बनवाया था || सोमवार से रविवार तक प्रतिदिन पूजा होती है। पूजा के हिस्से के रूप में जानवरों की बलि दी जाती है। मुख्य मंदिर के करीब नौ और मंदिर हैं। एक वार्षिक मेला हर साल कार्तिक के महीने में लगता है | इस मेले में हजारों तीर्थयात्री और भक्त पूजा के लिए और मेले को देखने के लिए इकट्ठा होते || • दक्षिणेश्वर काली मंदिर के बारे में 👇 यह मन्दिर प्रख्यात दार्शनिक एवं धर्मगुरु स्वामी रामकृष्ण परमहंस की कर्मभूमि रही है जो कि बंगाली अथवा हिन्दू नवजागरण के प्रमुख सूत्रधारों में से एक दार्शनिक/धर्मगुरु और रामकृष्ण मिशन के संस्थापक स्वामी विवेकानंद के गुरु थे। वर्ष 1857-68 के बीच स्वामी रामकृष्ण इस मंदिर के प्रधान पुरोहित रहे। तत्पश्चात उन्होंने इस मन्दिर को ही अपना साधनास्थली बना लिया। मन्दिर की प्रतिष्ठा और ख्याति का प्रमुख कारण है स्वामी रामकृष्ण परमहंस से इसका जुड़ाव। मंदिर के मुख्य प्रांगण के उत्तर पश्चिमी कोने में रामकृष्ण परमहंस का कक्ष आज भी उनकी ऐतिहासिक स्मृतिक के रूप में संरक्षित करके रखा गया है ||