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परशुराम अवतार: जब भगवान ने अत्याचार के विरुद्ध उठा ली अमोघ परशु!-भगवान विष्णु के 24 अवतार-Part 14 **“मित्रों… क्या होगा जब क्षत्रिय धर्म से भटक जाएँ? जब अत्याचार इतना बढ़ जाए कि पृथ्वी स्वयं काँप उठे? तब जन्म होता है— एक ऐसे अवतार का जिसमें ऋषि का तप है और योद्धा का क्रोध भी। यह कथा है— परशुराम अवतार की…”** नमस्कार मित्रों, मैं हूँ छोटा वाणी— और आप सुन रहे हैं Shlok Sarita, जहाँ हर श्लोक… एक कहानी बन जाता है। आज हम सुनेंगे भगवान विष्णु के उस रूप की गाथा, जो शांत भी है और उग्र भी— ✨ परशुराम अवतार ✨ 🕉️ संस्कृत श्लोक “क्षत्रियाणां क्षयं कृत्वा पृथिवीं चापि पूरयन्। रामोऽयं जामदग्न्योऽभूत् धर्मसंस्थापनाय हि॥” अर्थ: जामदग्नि के पुत्र परशुराम अत्याचार से बढ़े क्षत्रियों का नाश कर धर्म की पुनर्स्थापना हेतु प्रकट हुए। कथा की पृष्ठभूमि: अत्याचार का उदय समय था— जब क्षत्रिय शक्ति के मद में चूर होकर राज्य को अपनी निजी साम्राज्य-वृत्ति समझने लगे थे। अन्याय बढ़ रहा था, कमज़ोरों पर अत्याचार बढ़ रहा था। धरती माँ ने भारी स्वर में कहा— “प्रभो, मेरी पीठ पर अत्याचार का भार असहनीय हो गया है।” देवताओं ने प्रार्थना की— और समाधान मिला— “विष्णु स्वयं ऋषि-योद्धा रूप में अवतरित होंगे।” जन्म: ऋषि जामदग्नि और रेणुका के पुत्र रेणुका— पवित्रता की मूर्ति। जामदग्नि— तप के तीर्थ। उनके घर जन्म हुआ एक तेजस्वी बालक का— जिसकी आँखों में अग्नि की चमक, पर हृदय में शांति का समंदर। नाम रखा गया— ✨ राम पर संसार उन्हें कहने लगा— परशु-धारी राम— परशुराम। परशुराम का पहला धर्म-परीक्षण एक बार राजा कार्तवीर्य अर्जुन (हजारों भुजाओं वाला अत्याचारी राजा) परशुराम के आश्रम पहुँचा। वह जामदग्नि ऋषि की कामधेनु गाय “सुरभि” हड़पना चाहता था। जामदग्नि बोले— “राजन्, गाय आश्रम की है। अन्याय करोगे?” लेकिन कार्तवीर्य ने गाय छीन ली और आश्रम को रौंद दिया। परशुराम लौटे— और दृश्य देखा। उन्होंने भूमि को छूकर कहा— “जहाँ अत्याचार होता है— वहाँ परशुराम को उठना ही पड़ता है।” कार्तवीर्य अर्जुन का वध परशुराम ने अपने परशु (अद्भुत दिव्य अस्त्र) को उठाया। अत्याचारी राजा हजारों भुजाओं से आक्रमण करता रहा। परशुराम— अद्वितीय पराक्रम का रूप। प्रहार पर प्रहार। पर्वत-सी स्थिरता। और अंततः— कार्तवीर्य अर्जुन धराशायी। देवताओं ने कहा— “धर्म की रक्षा हेतु परशुराम का उदय हुआ है।” जामदग्नि का वध और परशुराम का संकल्प कार्तवीर्य के पुत्र प्रतिशोध में आए— और ऋषि जामदग्नि की हत्या कर दी। जब परशुराम लौटे, उन्होंने माता रेणुका को आँसुओं में देखा। उन्होंने धरती को थामकर कहा— “जिस हाथ में परशु है— उस हाथ में अन्याय नहीं रह सकता।” और उन्होंने तेईस बार पृथ्वी को अन्यायी और दुष्ट क्षत्रियों से मुक्त किया। यह कोई क्रोध नहीं— धर्म का शुद्ध रूप था। परशुराम का अंतिम उपदेश परशुराम ने कहा— **“शक्ति का उद्देश्य संरक्षण है— विनाश नहीं।”** **“जब शक्ति का मार्ग धर्म से हटे— तो विनाश निश्चित है।”** **“क्षमा का स्थान महत्त्वपूर्ण है— पर अन्याय के सामने मौन रहना अधर्म के बराबर है।”** उनका जीवन शक्ति और तप दोनों का संगम है। 🙏 धन्यवाद मित्रों, आज आपने सुना— • परशुराम का जन्म • कार्तवीर्य अर्जुन का अत्याचार • जामदग्नि ऋषि का वध • और धर्म की स्थापना के लिए परशुराम का अद्भुत संकल्प अब बताइए— परशुराम अवतार का कौन-सा क्षण आपको सबसे अधिक प्रेरित कर गया? अपने विचार कमेंट में लिखें। अगर आपको यह कथा सुंदर लगी— तो Like, Comment, Share करें और Shlok Sarita को Subscribe करें। 🌸 अगले भाग में सुनेंगे— राम अवतार की कथा (Part 15) फिर मिलेंगे मित्रों— तब तक के लिए राम राम। #meditation #shots #slokas #ramayan #bhagwatkatha #hindu #hindistories #viral #viralvideo #viralreels #shloka #shlokSarita #vrindavan @ShlokSarita / @shloksarita Subsribe me : / @shloksarita