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संक्षिप्त सारांश यह वचन-मनन नीतिवचन 24:10 पर आधारित है, जहाँ परमेश्वर हमें सिखाता है कि विपत्ति के समय साहस छोड़ना नहीं चाहिए। जीवन में क्लेश, कष्ट और कठिन परिस्थितियाँ आती हैं, लेकिन वही समय हमारे विश्वास और सामर्थ की असली परीक्षा होता है। यदि हम उस समय हिम्मत छोड़ देते हैं, तो हमारी शक्ति कमजोर पड़ जाती है। परमेश्वर कई बार विपत्तियों को हमारे जीवन में अनुमति देता है ताकि वह हमें शुद्ध करे, नम्र बनाए और हमारे भीतर छिपी बातों को प्रकट करे। कुछ क्लेश परमेश्वर की महिमा प्रकट करने के लिए होते हैं, जैसे शद्रक, मेशक और अबेदनगो या दानिय्येल के जीवन में हुआ। कुछ परिस्थितियाँ एक लंबी प्रक्रिया होती हैं, जिनके द्वारा परमेश्वर हमें पवित्रता की ओर ले जाता है। वचन सिखाता है कि क्लेश नाश के लिए नहीं, बल्कि सुधार और सिद्धता के लिए होते हैं। रोमियों और याकूब की पत्रियों में बताया गया है कि क्लेश से धीरज उत्पन्न होता है, धीरज से खरापन आता है और खरापन आशा को जन्म देता है। इसलिए क्लेश के समय दुखी या निराश होने के बजाय हमें आनंदित और स्थिर रहना चाहिए। यही वह समय है जब परमेश्वर हमारे भीतर काम कर रहा होता है। सच्चा विश्वास भावना, परिस्थिति या दूसरों के अनुभव पर आधारित नहीं होता, बल्कि परमेश्वर के वचन में जड़ पकड़ने से मजबूत होता है। जब हम वचन में स्थिर रहते हैं और धन्यवाद के साथ आगे बढ़ते हैं, तब विपत्ति के समय भी परमेश्वर हमें सामर्थ देता है और हमारी शक्ति घटने नहीं देता।