У нас вы можете посмотреть бесплатно भजन बिन ! भव न तरै व्यवहार।।(दादाजी) कौशल पवैया kaushal pawaiya или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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भजन बिन ! भव न तरै व्यवहार। बीच भंवर में गोता खावै, नांव बीच मंझधार।। भजन बिन ! भव न तरै व्यवहार।। ज पुरुषार्थ अपना चाहे, भक्ति कर्म सत्कार। राम भजन चिंतन कर हरि का, भव से उतरे पार।। भजन बिन ! भव न तरै व्यवहार। कहत मुरारी जिय अपने से, जो चाहे करै निस्तार। जिव्हा से हरि नाम राम जप, परमानंद विहार।। भजन बिन ! भव न तरै व्यवहार। भजन बिन ! भव न तरै व्यवहार। बीच भंवर में गोता खावै, नांव बीच मंझधार।। भजन बिन ! भव न तरै व्यवहार।। ************** मनुष्य सांसारिक मायाजाल में फंसा रहता है, जिसका कोई अंत नहीं है। इसलिए मानसिक शांति और उन्नति के लिए अध्यात्म के लिए समय निकालना अनिवार्य है। सत्संग संतों की कृपा से मिलता है और सच्चे संतों का मिलना ईश्वर की कृपा पर निर्भर करता है। पूज्य श्री स्वामी जी कहते है , लोग मनोरंजन सिनेमा, गाने पर बहुत धन और समय खर्च करते हैं। यदि वही उत्साह और आकर्षण सत्संग के प्रति हो जाए, तो संसार में वास्तविक शांति स्थापित हो सकती है। सत्संग गंभीर व्यक्तियों का विषय है, क्योंकि यहाँ 'हरि चर्चा' से शांति-रस की प्राप्ति होती है। आंतरिक परिवर्तन और समाज सत्संग के माध्यम से ही मनुष्य को 'पाप' और 'पुण्य' के बीच का अंतर समझ आता है। 🌹परम पूज्य श्री स्वामी सत्यानंद जी महाराज जी ************ भजन रचना: पूज्य पिता श्री मुरारीलाल जी पवैया दादा जी की डायरी : "सत्य स्मृति" दिनाँक: 20-8-84 पृष्ठ क्रमांक: 53, "श्रद्धा" "भव न तरेगी" मुरार ग्वालियर धुनबद्ध एवं स्वर: कौशल पवैया दिनाँक : 20 जनवरी 2025 प्रातः काल, नोयडा स्प्ष्ट एवं मधुर स्टीरियो आवाज में सुनने हेतु कृपया ब्लूटूथ स्पीकर अथवा कान में ईयरफोन कोड से अथवा मोटर कार के स्टीरियो डैक में श्रवण कीजिएगा।