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गोची जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति की प्रसिद्ध गाहर घाटी के बिलिंग गांव में आज से पुत्र प्राप्ति के अवसर पर मनाए जाने वाले पारंपरिक एवं सांस्कृतिक महत्व से जुड़े गोची उत्सव का विधिवत शुभारंभ हो गया। उत्सव को लेकर गांव में विशेष उत्साह और उल्लास का माहौल बना हुआ है तथा पूरा गांव जश्न के रंग में रंगा नजर आ रहा है। उत्सव की शुरुआत गांव के आराध्य देवता अठारह नाग की विधिवत पूजा-अर्चना से की गई। पूजा के बाद ग्रामीणों ने पारंपरिक ग्रेक्स गाकर रीति-रिवाजों के अनुसार पूरे गांव में उत्सव मनाया। लोकगीतों और पारंपरिक रस्मों के साथ वातावरण पूरी तरह सांस्कृतिक रंग में सराबोर हो गया। इस वर्ष बिलिंग गांव के लारजे परिवार के जायलत्से नोरबू, स्वाची परिवार के जिगमेद उरज्ञान, पांस परिवार के जितसेन नमसेल तथा गुमलिंगपा परिवार के जिगमेद तोबदन के यहां पुत्र रत्न की प्राप्ति होने पर यह उत्सव सामूहिक रूप से आयोजित किया जा रहा है। परिवारों की खुशियों में पूरा गांव सहभागी बनकर सामाजिक एकता का उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। गोची उत्सव लाहौल की प्राचीन लोक परंपरा का प्रतीक है। इस अवसर पर ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा धारण कर एक-दूसरे के घर जाकर पूजा-अर्चना करते हैं, बधाइयां देते हैं और आपसी भाईचारे व सामाजिक सौहार्द का संदेश देते हैं। सामूहिक भोज, पारंपरिक व्यंजन और मेल-मिलाप इस पर्व के मुख्य आकर्षण होते हैं। उत्सव की एक प्रमुख परंपरा के तहत कल लबदागपा द्वारा तीर चलाकर अगले वर्ष पुत्र प्राप्ति से संबंधित भविष्यवाणी भी की जाएगी। सदियों पुरानी इस मान्यता को आज भी ग्रामीण पूरे श्रद्धा भाव से निभाते हैं और इसे शुभ संकेत के रूप में देखते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गोची उत्सव केवल पारिवारिक खुशी तक सीमित नहीं, बल्कि यह पूरी घाटी को जोड़ने वाला सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजन है, जो नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, परंपराओं और सामूहिक जीवन मूल्यों से परिचित कराता है। गौरतलब है कि गाहर घाटी में यह उत्सव आज भी पूर्वजों की परंपराओं के अनुसार पूरे श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है, जिससे क्षेत्र में सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा मिलता है। सुरेन्द्र तिबोगपा