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🕉️ ॐ ध्यान के लाभ 1. मस्तिष्क तरंगों पर प्रभाव ॐ ध्यान के दौरान जब व्यक्ति धीमी और लयबद्ध ध्वनि में “ॐ” का उच्चारण करता है, तो मस्तिष्क की गतिविधि में बदलाव देखा जाता है। वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि इससे अल्फा (Alpha) और थीटा (Theta) ब्रेन वेव्स बढ़ती हैं, जो गहरी शांति, रचनात्मकता और ध्यानावस्था से जुड़ी होती हैं। साथ ही, तनाव और अधिक सोच से संबंधित बीटा वेव्स की तीव्रता कम हो सकती है। यह परिवर्तन मन को शांत और स्थिर अवस्था में लाने में सहायक होता है। 2. वागस नर्व की सक्रियता ॐ के उच्चारण के दौरान उत्पन्न होने वाला कंपन गले और छाती के क्षेत्र में महसूस होता है। यह कंपन वागस नर्व (Vagus Nerve) को उत्तेजित कर सकता है, जो शरीर के पैरासिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वागस नर्व की सक्रियता हृदय गति को संतुलित करने, तनाव हार्मोन को कम करने और शरीर को आराम की अवस्था में लाने में मदद करती है। इसी कारण ॐ जप के बाद व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक शांति का अनुभव होता है। 3. पैरासिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम का सक्रिय होना जब हम धीमी, गहरी साँस के साथ ॐ का उच्चारण करते हैं, तो शरीर “फाइट या फ्लाइट” मोड से निकलकर “रेस्ट एंड डाइजेस्ट” मोड में आ सकता है। इसे पैरासिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम की सक्रियता कहा जाता है। इस अवस्था में रक्तचाप कम हो सकता है, मांसपेशियों का तनाव घटता है और शरीर की प्राकृतिक मरम्मत तथा संतुलन प्रक्रिया बेहतर होती है। यही कारण है कि नियमित ॐ ध्यान तनाव प्रबंधन में सहायक माना जाता है। 4. श्वसन तंत्र पर प्रभाव ॐ ध्यान में लंबा और नियंत्रित उच्चारण स्वाभाविक रूप से गहरी और धीमी श्वास को प्रोत्साहित करता है। इस प्रक्रिया से फेफड़ों की क्षमता का बेहतर उपयोग होता है और शरीर को अधिक ऑक्सीजन मिलती है। धीमी श्वास लेने से कार्बन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन का संतुलन सुधरता है, जिससे चक्कर, घबराहट और तनाव जैसी समस्याएँ कम हो सकती हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से नियंत्रित श्वसन मानसिक शांति और शारीरिक स्थिरता दोनों में सहायक है। 5. हृदय गति परिवर्तनशीलता (HRV) में सुधार हृदय गति परिवर्तनशीलता (Heart Rate Variability) यह दर्शाती है कि हमारा हृदय विभिन्न परिस्थितियों के अनुसार कितनी लचीलापन से प्रतिक्रिया देता है। उच्च HRV बेहतर तनाव प्रबंधन और भावनात्मक संतुलन से जुड़ा होता है। शोध बताते हैं कि धीमी साँस और मंत्र जप जैसी प्रक्रियाएँ HRV को बढ़ा सकती हैं। ॐ ध्यान इसी प्रकार की लयबद्ध श्वसन प्रक्रिया को बढ़ावा देता है, जिससे हृदय और तंत्रिका तंत्र का समन्वय बेहतर होता है। 6. लिम्बिक सिस्टम पर प्रभाव मस्तिष्क का लिम्बिक सिस्टम भावनाओं, भय और तनाव से संबंधित होता है। कुछ न्यूरोइमेजिंग अध्ययनों से संकेत मिलता है कि मंत्र जप या ॐ ध्यान के दौरान अमिगडाला (Amygdala) की सक्रियता कम हो सकती है, जो भय और तनाव से जुड़ी होती है। साथ ही, प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स, जो निर्णय लेने और भावनात्मक संतुलन से संबंधित है, अधिक सक्रिय हो सकता है। यह संतुलन व्यक्ति को अधिक शांत और संयमित प्रतिक्रिया देने में मदद करता है। 7. ध्वनि कंपन और रेज़ोनेंस प्रभाव ॐ एक कंपनात्मक ध्वनि है, जो उच्चारण के समय पूरे शरीर में हल्का कंपन उत्पन्न करती है। यह कंपन छाती, गले और सिर के क्षेत्र में रेज़ोनेंस पैदा करता है। वैज्ञानिक रूप से ध्वनि कंपन शरीर के ऊतकों और तंत्रिका तंत्र पर प्रभाव डाल सकता है, जिससे ध्यान की अवस्था गहरी हो सकती है। यह रेज़ोनेंस मन और शरीर के बीच समन्वय की अनुभूति को मजबूत करता है। 8. न्यूरोप्लास्टिसिटी का समर्थन नियमित ध्यान अभ्यास मस्तिष्क की न्यूरोप्लास्टिसिटी, अर्थात नई तंत्रिका कड़ियों के निर्माण की क्षमता, को प्रभावित कर सकता है। अध्ययनों से यह संकेत मिलता है कि लगातार ध्यान करने से ध्यान, स्मृति और भावनात्मक नियंत्रण से जुड़े मस्तिष्क क्षेत्रों की संरचना और कार्यप्रणाली में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं। ॐ ध्यान भी इसी प्रकार के दोहराव और एकाग्रता पर आधारित अभ्यास के कारण मस्तिष्क को स्थिर और प्रशिक्षित करने में सहायक हो सकता है। 9. माइंडफुलनेस और मानसिक स्पष्टता ॐ का जप एक बिंदु पर ध्यान केंद्रित करने की प्रक्रिया है। जब मन बार-बार उसी ध्वनि पर लौटता है, तो अनावश्यक विचारों की गति धीमी हो सकती है। यह माइंडफुलनेस की अवस्था को बढ़ाता है, जहाँ व्यक्ति वर्तमान क्षण में अधिक जागरूक रहता है। इससे मानसिक थकान कम होती है और भावनात्मक संतुलन में सुधार आता है। #om #yoga #meditation #bhaktisong #bhajan #omnamahshivaya #youtubeshorts #youtube