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Lyrics : हवाओं में घुली है, वही एक अनकही बातें तड़पती हैं ख़यालों में, तुम्हारी ही मुलाक़ातें नसीबों की लकीरों से, तेरा नाम जो मिटाया है बिछड़ के तुझसे ही हमने, तुझे ही ख़ुद में पाया है कि साँसें राग गाती हैं, जुदाई के तराने का बहाना मिल नहीं पाता, तुझे वापस बुलाने का... मेरे सब्र का ये बाँध है, इसे टूटने से बचा सको तो बचा लो तुम, मुझे अपना तुम बना सको ये इश्क़ नहीं इबादत है, जो ख़ाक में मिल जाएगी मेरे नाम की ये कालिख ही, तेरी याद बन रह जाएगी कलंक है तो रहने दो... कलंक है तो रहने दो... तेरी महफ़िल का ये मंज़र, मुझे तन्हा ही सहने दो कलंक है तो रहने दो... वो मन्दिर की दुआओं सा, वो मस्जिद की अज़ानों सा हमारा साथ था लेकिन, पुरानी दास्तानों सा तू साहिल थी किनारा थी, मैं लहरों सा भटकता था तू ठहरी धूप सी निर्मल, मैं ओस सा टपकता था मगर ये रीत दुनिया की, हमें मिलने नहीं देगी मोहब्बत की कोई क्यारी, यहाँ खिलने नहीं देगी... ये रूह का जो रोग है, इसे रूह तक ही रहने दो जो अश्क गिरें पलकों से, इन्हें चुपचाप बहने दो कलंक है तो रहने दो... कलंक है तो रहने दो... मेरा सज़दा भी तू, मेरा रस्ता भी तू है अधूरा ये बैराग मेरा... कलंक है तो रहने दो।