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AigiriNandini #AigirNandiniStotram #DugaDevi 'Aigiri Nandini Nanditha Medhini' is a very popular Durga Devi Stotram. Mahishasur Mardini is an incarnation of Goddess Durga which was created to kill the demon Mahishasur. 'Aigiri Nandini is addressed to Goddess Mahishasur Mardini. Mahishasur Mardini is the fierce form of Goddess Durga where she is depicted with 10 arms, riding on a lion and carrying weapons. #AigiriNandini #AigirNandiniStotram #DugaDevi #Mahishasur #Navratri2026 #rajshrisoul #goddess #spirituality #spiritualgrowth #removenegativeenergy #healing #mantraforpeace #dailychanting अयि गिरिनंदिनि - महिषासुर मर्दिनी # मॉ दुरगा के अब्द्त रू्प और शक्ति का अनूभव कीजिए, इस पावन स्तोत्र के साथ जिसे माधुबंती बागची की मधुर आवाज़ में प्रसुत कियागया है। इसका संगीत सिद्धारथ अमित भावसार ने बड़ी खूबसूरती सेतैयार किया है। यह स्तोत्र देवी दूर्ा की विजय गाथा का गुणगान करता है, जो बूराईका अंत करने वाली और हमारे जीवन में साहस एवं भक्ति का संचारकरने वाली हैं၊ उनकी कृपा से हमारा मन मजबूत और आस्मा दिव्यऊতरज्जा से भर जाती है1 इस पावन नवरात्रि पर, मॉ दूर्ग आपकी और आपके परिवार की रक्षा करें, समूद्च्,ि सुख और दिव्य आशीरवा्दें की वर्ष करें आदिशक्ति मॉ दूर्ा को अयि गीरिनन्दिनि कहा जाता है। अयि गिरिननदिनि का अर्थ है पर्वत की पुतरि| हिमालयराज की कन्या| मॉ दुर्गा को महिषासुर मर्दिनी भी कहा जाता है क्योंकि उन्होंने महिআासुर राक्षस का वध किया था| पुराणों में उल्लेखित के अनुसार केवल मानच ही नहीं देवता भी असुरोंके अत्याचार से परेशान हों गए थे। तब सभी देवगण बरत्राजी के पासगाए और एन्से सामाधान मÍगाI तब ब्न्ा जी न बराया ीकि टैर्यराजका वध एक कुंवारी कन्या के हाथ ही हों सकता है इसके बाद सभीदेवताओं ने मिलकर अपने तेज को एक जगह समाहिस किया औरइस शक्ति से देवी का जन्म हुआ। देवी के शरीर का अंग प्रत्येक देवकी शक्ति क अंश से उत्पन हुआ था देवी का जन्म तो हो गया, लेकिनमहिषासुर के अं्त के लिए ेरी को अभ भी अपार श्ि की जरूरतथी। तब भगवान शिव ने उनको अपना त्रिशूल, भगवान विष्गु नेचद्र, हनुमान जी ने गदा, श्रीराम ने धनुष, अम्नि न शक्ि व बाणं सेभरे तरकश, वरुण ने दिव्य शांखु, प्रजापति ने स्फटिक मणियों कीमाला, लक्षमीजी ने कमल का फ्ूल, इंद्र ने वज, शेषनाग ने मणियों सेसुशोनभित नाग, वरुण देचव ने पाश व तीर, बर्वाजी ने चारों वेद तथाहिमालय पर्वत ने माता उनका वाहन सिंह दिया। इुन सभी असू्-शरन्नको देवी दूर्गा ने अपनी 18 भुजाओं में धारण किया अख्र-शख् औरआंतरिक शक्ति से देवी का विराट रूप बन गया और असुर उन्हें देखकर ही भयभीत होने लगे। देवी के पास सभी देवताओं की शक्तियां हेंउनके जैसा कोई दूसरा शक्तिशाली नहीं है, उनमें अपार शक्ति है, उनशक्तियों का कोरई अंत नहीं है, इसलिए वे आदिशक्ति कहलाती हैं