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mo 9926804677 contact me ---------------------------कबीर दास जी के इस भजन----------- "मत बन जीवड़ा नींद हरामी" (या "मत ले रे जीवड़ा नींद हरामी") का मुख्य सारांश नीचे दिया गया है: यह एक प्रसिद्ध चेतावनी भजन है, जिसमें कबीर दास जी मनुष्य को सांसारिक मोह-माया और आलस्य से जागने का संदेश देते हैं। YouTube +2 मुख्य सारांश (Main Summary): आलस्य का त्याग: कबीर कहते हैं कि हे जीव (मनुष्य), तू इस "नींद हरामी" यानी अज्ञानता और आलस्य की नींद में मत सो। यह जीवन बहुत छोटा है, और इसे व्यर्थ के कामों या सोने में गंवाना मूर्खता है। जीवन की क्षणभंगुरता: भजन के माध्यम से यह समझाया गया है कि यह संसार एक "सराय" (मुसाफिरखाना) की तरह है जहाँ हम केवल दो दिन के मेहमान हैं। मनुष्य खाली हाथ इस दुनिया में आया था और अंत में खाली हाथ ही चला जाएगा। कर्म और भक्ति का महत्व: कबीर जी जोर देते हैं कि थोड़े से जीवन के लिए इतना मोह और अहंकार क्यों? वे मनुष्य को सलाह देते हैं कि "सतनाम" को रट लो और प्रभु का सुमिरन करो, अन्यथा अंत समय में केवल पछतावा ही हाथ लगेगा। चेतावनी: भजन की पंक्तियाँ बार-बार याद दिलाती हैं कि सांसारिक सुखों में डूबकर अपनी आत्मा के असली लक्ष्य (परमात्मा से मिलन) को मत भूलो। जब मौत सिर पर आएगी, तब धन-दौलत और रिश्ते-नाते किसी काम नहीं आएंगे। YouTube +8 संक्षेप में, यह भजन हमें जागृत होने, प्रभु भक्ति में समय लगाने और जीवन की वास्तविकता को समझने की प्रेरणा देता है।