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उदयपुर (लोद) गोल्ज्यू की कथा और महत्व: मूल स्थान और प्रादुर्भाव: स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, उदयपुर (लोद) गोल्ज्यू महाराज के प्रमुख थान (स्थान) में से एक है। कुमाऊं की लोकगाथाओं (जागर) में जिक्र आता है कि जब गोल्ज्यू महाराज चम्पावत से चले थे, तो उन्होंने विभिन्न स्थानों पर अपना निवास बनाया था। लोद-उदयपुर का यह क्षेत्र उनकी न्यायप्रियता और चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है। न्याय के देवता के रूप में पूजा: चितई गोल्ज्यू की तरह ही, उदयपुर लोद में भी लोग अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अर्जी (पत्र) चढ़ाते हैं। यहाँ के बारे में कहा जाता है कि यदि कोई व्यक्ति सच्चे मन से यहाँ आकर न्याय की गुहार लगाता है, तो उसे निराश नहीं होना पड़ता। सोमेश्वर घाटी का रक्षक: लोद और सोमेश्वर के आसपास के गाँवों के लोग गोल्ज्यू महाराज को अपना इष्टदेव और संरक्षक मानते हैं। खेती की बुवाई हो या घर में कोई शुभ कार्य, सबसे पहले गोल्ज्यू महाराज का स्मरण किया जाता है। यहाँ अक्सर 'जागर' का आयोजन होता है, जिसमें डंगरिया पर देवता अवतरित होकर लोगों के दुखों का निवारण करते हैं। मंदिर की विशेषता: यह मंदिर सोमेश्वर से कुछ दूरी पर पहाड़ी और प्राकृतिक सुंदरता के बीच स्थित है। यहाँ भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने पर घंटियां चढ़ाते हैं। मंदिर परिसर में सैकड़ों घंटियां उनकी महिमा का प्रमाण देती हैं। गोल्ज्यू महाराज को यहाँ भी सफेद घोड़े पर सवार, हाथ में धनुष-बाण लिए हुए न्यायकारी राजा के रूप में पूजा जाता है।