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बिहार का भौगोलिक और भौतिक विभाजन: एक विस्तृत ब्रीफिंग यह दस्तावेज़ बिहार की भौगोलिक संरचना, इसके क्षेत्रीय वर्गीकरण और भौतिक विशेषताओं का एक व्यापक विश्लेषण प्रदान करता है। बिहार की भौगोलिक बनावट मुख्य रूप से इसकी जलवायु, मिट्टी, वनस्पति और भूमि उपयोग को निर्धारित करती है। कार्यकारी सारांश बिहार की भौगोलिक संरचना को मुख्य रूप से तीन प्रमुख इकाइयों में विभाजित किया जा सकता है: शिवालिक पर्वत श्रृंखला, बिहार का (इंडो-गंगेटिक) मैदान, और दक्षिणी संकीर्ण पठार। राज्य का लगभग 96.7% हिस्सा गंगा और उसकी सहायक नदियों द्वारा निर्मित मैदानों के अंतर्गत आता है। उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित शिवालिक श्रृंखला हिमालय का हिस्सा है, जो नेपाल के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करती है। उत्तर बिहार का मैदान अपनी नदियों (विशेषकर कोसी) और 'चुआड़' (गोखुर झीलों) के लिए जाना जाता है, जबकि दक्षिणी भाग पहाड़ियों और पठारों से घिरा है। -------------------------------------------------------------------------------- 1. बिहार का मुख्य भौगोलिक वर्गीकरण भौतिक और संरचनात्मक स्थितियों के आधार पर बिहार को निम्नलिखित तीन श्रेणियों में बांटा गया है: भौगोलिक इकाई उप-विभाजन प्रमुख क्षेत्र/विशेषताएं शिवालिक पर्वत श्रृंखला रामनगर डून, सोमेश्वर श्रृंखला, हरहा घाटी उत्तर-पश्चिमी चंपारण, हिमालय का भाग बिहार का मैदान उत्तर बिहार मैदान, दक्षिण बिहार मैदान राज्य का 96.7% क्षेत्र, जलोढ़ निक्षेप दक्षिणी संकीर्ण पठार कैमूर, गया, नवादा, राजगीर, मुंगेर पहाड़ी क्षेत्र और संकीर्ण पठार -------------------------------------------------------------------------------- 2. शिवालिक पर्वत श्रृंखला (हिमालयी पर्वतीय क्षेत्र) यह क्षेत्र बिहार के उत्तर-पश्चिमी भाग में पश्चिम चंपारण जिले के उत्तरी क्षेत्र में स्थित है। यह सिनोज़ोइक युग में निर्मित हुआ था और लगभग 932 वर्ग किलोमीटर में फैला है। इसकी औसत ऊँचाई 80 से 250 मीटर के बीच है। i. रामनगर डून अवस्थिति: सोमेश्वर पहाड़ियों के दक्षिणी किनारे पर स्थित पहाड़ियों की एक श्रृंखला। विस्तार: 32 किमी लंबा और 6-8 किमी चौड़ा। क्षेत्रफल: 214 वर्ग किलोमीटर। विशेषता: इसकी सबसे ऊँची चोटी संतपुर (242 मीटर) के पास स्थित है। ii. सोमेश्वर श्रृंखला निर्माण: यह श्रृंखला तृतीयक (Tertiary) काल में बनी थी। विस्तार: 70 किमी लंबी और 84 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली। ऊँचाई: औसत ऊँचाई 450 मीटर से अधिक है। राज्य की सबसे ऊँची चोटी, सोमेश्वर किला (880 मीटर), इसी श्रृंखला में है। अंतरराष्ट्रीय सीमा: यह श्रृंखला भारत और नेपाल के बीच सीमा निर्धारित करती है। प्रमुख दर्रे (Passes): नदियों की क्रियाओं से यहाँ सोमेश्वर, भिखना ठोरी और मारवट जैसे दर्रे बने हैं, जो क्रमशः तुरी पानी, कुड़ी और हरहा नदियों द्वारा निर्मित हैं। iii. हरहा घाटी (दून घाटी) अवस्थिति: सोमेश्वर और रामनगर श्रृंखलाओं के बीच स्थित। विस्तार: 21 किमी लंबी और 214 वर्ग किमी क्षेत्र में विस्तृत। विशेषता: इसकी औसत ऊँचाई 152 मीटर है और अधिकतम ऊँचाई 240 मीटर है। यह गंगा के समतल मैदान से अधिक ऊँचाई पर स्थित है। -------------------------------------------------------------------------------- 3. बिहार का मैदान (इंडो-गंगेटिक मैदान) यह विशाल मैदान उत्तर में हिमालयी पहाड़ों और दक्षिण में छोटा नागपुर पठार के बीच स्थित है। यह गंगा और उसकी सहायक नदियों द्वारा लाए गए जलोढ़ अवसादों से बना है। उत्तर बिहार का मैदान यह गंगा नदी के उत्तर में स्थित है और लगभग 56,980 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करता है। प्रमुख क्षेत्र: तिरहुत, सारण, पूर्णिया, दरभंगा और कोशी मंडल। नदियाँ: गंडक, घाघरा, बुढ़ी गंडक, बागमती, कमला, कोशी और महानंदा। तराई क्षेत्र: उत्तर-पश्चिमी भाग (चंपारण) में उच्च ऊँचाई वाला तराई क्षेत्र है। यहाँ की मिट्टी चट्टानी और छिद्रित है, जिसमें पानी का स्तर अधिक होता है। यहाँ साल के जंगल और ऊँची घास पाई जाती है। ढलान: इस मैदान की ढलान उत्तर से दक्षिण और उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की ओर है। चुआड़ (Chuar): ये नदियाँ अपने मार्ग बदलने के लिए जानी जाती हैं, जिससे ओक्सबो झीलें (Oxbow Lakes) या नदियों के परित्यक्त चैनल बनते हैं, जिन्हें स्थानीय रूप से 'चुआड़' कहा जाता है। ये बेगूसराय, समस्तीपुर, सहरसा और कटिहार में पाए जाते हैं। कोसी नदी: इसे अपनी विनाशकारी बाढ़ और मार्ग परिवर्तन की प्रकृति के कारण 'बिहार का दुख' कहा जाता है। मैदान का क्षेत्रीय विभाजन (दोआब) दो नदियों के बीच की भूमि को दोआब कहा जाता है। उत्तर बिहार के मैदान को मुख्य रूप से तीन दोआबों में विभाजित किया गया है: 1. घाघरा-गंडक दोआब 2. गंडक-कोशी दोआब 3. कोशी-महानंदा दोआब -------------------------------------------------------------------------------- 4. दक्षिणी संकीर्ण पठार बिहार का दक्षिणी भाग पहाड़ी और पठारी संरचनाओं से बना है। इसमें निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं: कैमूर/रोहतास पठार गया पहाड़ी क्षेत्र नवादा पहाड़ी क्षेत्र राजगीर पहाड़ी क्षेत्र मुंगेर पहाड़ी क्षेत्र -------------------------------------------------------------------------------- निष्कर्ष बिहार की भौगोलिक विविधता उत्तर में शिवालिक की ऊँची श्रेणियों से लेकर मध्य के विशाल उपजाऊ मैदानों और दक्षिण के पठारी क्षेत्रों तक फैली हुई है। राज्य का अधिकांश हिस्सा (96.7%) जलोढ़ मैदान है, जो कृषि और जल संसाधनों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। नदियों का जाल और उनकी भू- आकृतिक गति विधियाँ, जैसे चुआड का निर्माण और मार्ग परिवर्तन, बिहार की विशिष्ट भौगोलिक पहचान को परिभाषित करते हैं। #बिहारकाभूगोल, #bihargk #fact&theory #bihargeography #gk #generalknowledge