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चीन के वैज्ञानिकों को मिला DRDO से 17,470% ज्यादा तो भारत के वैज्ञानिक कैसे टक्कर देंगे । भारत में फाइटर जेट इंजन जैसे जटिल रक्षा प्रोजेक्ट्स की असफलता का आरोप अक्सर सीधे DRDO और वैज्ञानिकों पर डाल दिया जाता है। कावेरी इंजन परियोजना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। लेकिन क्या कभी यह सवाल उठाया गया कि इन परियोजनाओं को मिला बजट, समय और राजनीतिक समर्थन कितना था? चीन ने पिछले दो दशकों में एरो इंजन तकनीक पर लगभग 42 अरब डॉलर खर्च किए, जबकि भारत में कावेरी इंजन परियोजना को अब तक सिर्फ 239 मिलियन डॉलर ही मिले। प्रतिशत में देखा जाए तो चीन ने भारत की तुलना में लगभग 17,470% ज्यादा निवेश किया। कम बजट, भारी तकनीकी दबाव और असंतुलित लक्ष्य के बीच काम कर रहे भारतीय वैज्ञानिकों से चीन जैसी सफलता की उम्मीद करना कितना सही है? इस वीडियो में हम आंकड़ों के साथ समझेंगे कि असली समस्या वैज्ञानिक नहीं, बल्कि सिस्टम है।