У нас вы можете посмотреть бесплатно भगवद्गीता अध्याय ५ | श्लोक ११ ते २० | कर्मसंन्यास योग | समदृष्टी आणि स्थिरबुद्धीचे रहस्य или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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भगवान श्रीकृष्ण कर्म, ज्ञान आणि समत्व यांचे गूढ स्पष्ट करतात. निष्काम भावाने केलेले कर्म अंतःकरण शुद्ध करते. जो कर्माचे फळ भगवानाला अर्पण करतो तोच खरा योगी. आत्मा कर्ता नसून सर्व क्रिया प्रकृती करते. ज्ञानाचा प्रकाश अज्ञानाचा अंधार दूर करतो. ज्ञानी पुरुष सर्व जीवांमध्ये समान आत्मा पाहतो — हीच समदृष्टी. सुख-दुःखात स्थिर राहणे म्हणजेच ब्रह्मनिष्ठ अवस्था. ✨ या श्लोकांमध्ये आपल्याला समजते की संसारात राहूनही आसक्ती सोडून कर्म केल्यास मनुष्य शांती आणि मुक्ती प्राप्त करू शकतो. 🙏 हा भाग आपल्याला शिकवतो — “कर्म करा, पण फलाची आसक्ती सोडा; सर्व काही परमेश्वराला अर्पण करा.” motivation #srimadbhagvadgeeta #youtube #youtubeshorts #shortsvideo #shortsviral