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film- border orginal credit-Javed Akhtar l Sonu Nigam l Roop kumar rathore l vishal mishra l new lyrics by- jayhind singh संदेशे आते हैं हमें बुलाते हैं कि घर कब आओगे कि घर कब आओगे बोलो कब आओगे क्या एसे ही तुम.. रुलाओगे कि घर कब आओगे कि घर कब आओगे बोलो कब आओगे कि तुम बिन ये घर सूना सूना है.. तुम बिन अधुरे हम.. मन खाली खाली सा याद है चांदनी रात.. करवाचौथ की थाली का.. हंस्ता हूं निखरता हूं.. उनकी चाहत मे सवेरा होता है. उनकी मुस्कुराहट से मुलाक़ाते होती हैं..उनकी यादों से बाते करता हूँ..अनकही बातों से किसी की निगाहों ने तकती राहों ने ज़ुल्फ़ की छाँवों ने और पूछा है उनकी बाहों ने कि घर कब आओगे कि घर कब आओगे बोलो कब आओगे कि तुम बिन ये दिल सूना सूना है....... नींदो के ..रात करवट मे वो कहती है.. कट जाती है सूखे होठों से कोई बुलाता है मैं एक दिन आऊंगा सपने सजाता है उसे समझाऊंगा यही सोचा है मैं भी तन्हा हूँ ये दिल भी रोता है तरसती धड़कन ने मन की तड़पन ने सुने आंगन ने और पूछा है.. बरस ते सावन ने कि घर कब आओगे कि घर कब आओगे लिखो कब आओगे कि तुम बिन ये दिल सूना ..सूना है साथ छोड़ आया..खेत खलियानों को देश पहले है..हम जवानों को.. गाँव के मेलो का गली के झूलों का खुशबू यहाँ तक है बगीचे फूलों का माँ की ममता का.. मैं बेटा राजा हूँ पिता का कंधा मैं किया जो वादा हूँ जिगरी यारों ने गली गलियारों ने नुक्कड़ बाज़ारों ने और पूछा है..सारे त्योहारों ने... कि घर कब आओगे कि घर कब आओगे लिखो कब आओगे कि तुम बिन ये दिल सूना सूना है बहना का घर आना..वो दिन राखी का भैया की नम आँखें..वो रोना दादी का बुलावा आया है माँ की चिट्ठी में मैं तो समर्पित हूँ..देश की मिट्टी में उड़ती पतंगो ने होली के रंगो ने गले मिलना वो यारो के कंधो ने सेज वो खाली सी मेरी दिलवाली की आँखे सवाली सी और पूछा है रात दिवाली की.. कि घर कब आओगे कि घर कब आओगे तुम बिन ये घर सूना.. सूना है...... कि तुम बिन ये दिल सूना सूना है....