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जय जय नारायण नारायण हरि हरि, स्वामी नारायण नारायण हरि हरि, तेरी लीला सब से न्यारी न्यारी हरि हरि, तेरी महिमा प्रभु है प्यारी प्यारी हरि हरि, अलख निरंजन, भवभय भंजन ,जनमन रंजन दाता, हमें शरण दे अपने चरण में, कर निर्भय जगत्राता। तुने लाखों की नईया तारी तारी हरि हरि॥ प्रभु के नाम का पारस जो छूले वो हो जाए सोना। दो अक्षर का शब्द हरि है, लकिन बड़ा सलोना। उसने संकट टाले भारी भारी हरि हरि॥ हरि का भजन करो हरि है तुम्हारा | हरि के भजन बिन, नहीं गुजारा || हरि नाम से तेरा काम बनेगा | हरि नाम ही तेरे साथ चलेगा || हरि नाम लेने वाला, हरि का है प्यारा || कोई काहे राधेश्याम, कोई काहे सीताराम | कोई गिरिधर गोपाल, कोई राधामाधव लाल | वोही हरि दीन बंधू, वोही करी करुना सिन्धु, नमो बारम्बारा || सुख़ दुःख भोगे जाओ, लेखा सब मिटाते जाओ | हरि गुण जाओ, हरि को रिझाते जाओ | वोही हरि दीन बंधू, वोही करी करुना सिन्धु, सब का है प्यारा || दीनो पर दया करो, बने तो सेवा भी करो | मोह सब दूर करो, प्रेम हरि ही से करो | यही भक्ति यही योग, यही ज्ञान सारा || जो भजे हरि को सदा, सोही परम पद पावेगा | देह के माला, तिलक और छाप, नहीं किस काम के, प्रेम भक्ति बिना नहीं नाथ के मन भावे | दिल के दर्पण को सफा कर, दूर कर अभिमान को, ख़ाक को गुरु के कदम की, तो प्रभु मिल जायेगा | छोड़ दुनिए के मज़े सब, बैठ कर एकांत में, ध्यान धर हरि का, चरण का, फिर जनम नही आयेगा | द्रिड भरोसा मन मे करके, जो जपे हरि नाम को, कहता है ब्रह्मानंद, बीच समाएगा | जय जय नारायण नारायण हरि हरि, स्वामी नारायण नारायण हरि हरि। तेरी लीला सब से न्यारी न्यारी हरि हरि, तेरी महिमा प्रभु है प्यारी प्यारी हरि हरि॥ अलख निरंजन, भवभय भंजन ,जनमन रंजन दाता। हमें शरण दे अपने चरण में, कर निर्भय जगत्राता। तुने लाखों की नईया तारी तारी हरि हरि॥ प्रभु के नाम का पारस जो छूले वो हो जाए सोना। दो अक्षर का शब्द हरि है, लकिन बड़ा सलोना। उसने संकट टाले भारी भारी हरि हरि॥ हरि का भजन करो हरि है तुम्हारा | हरि के भजन बिन, नहीं गुजारा || हरि नाम से तेरा काम बनेगा | हरि नाम ही तेरे साथ चलेगा || हरि नाम लेने वाला, हरि का है प्यारा || कोई काहे राधेश्याम, कोई काहे सीताराम | कोई गिरिधर गोपाल, कोई राधामाधव लाल | वोही हरि दीन बंधू, वोही करी करुना सिन्धु, नमो बारम्बारा || सुख़ दुःख भोगे जाओ, लेखा सब मिटाते जाओ | हरि गुण जाओ, हरि को रिझाते जाओ | वोही हरि दीन बंधू, वोही करी करुना सिन्धु, सब का है प्यारा || दीनो पर दया करो, बने तो सेवा भी करो | मोह सब दूर करो, प्रेम हरि ही से करो | यही भक्ति यही योग, यही ज्ञान सारा || जो भजे हरि को सदा, सोही परम पद पावेगा | देह के माला, तिलक और छाप, नहीं किस काम के, प्रेम भक्ति बिना नहीं नाथ के मन भावे | दिल के दर्पण को सफा कर, दूर कर अभिमान को, ख़ाक को गुरु के कदम की, तो प्रभु मिल जायेगा | छोड़ दुनिए के मज़े सब, बैठ कर एकांत में, ध्यान धर हरि का, चरण का, फिर जनम नही आयेगा | द्रिड भरोसा मन मे करके, जो जपे हरि नाम को, कहता है ब्रह्मानंद, बीच समाएगा | जय जय नारायण नारायण हरि हरि, स्वामी नारायण नारायण हरि हरि। तेरी लीला सब से न्यारी न्यारी हरि हरि, तेरी महिमा प्रभु है प्यारी प्यारी हरि हरि॥ अलख निरंजन, भवभय भंजन ,जनमन रंजन दाता। हमें शरण दे अपने चरण में, कर निर्भय जगत्राता। तुने लाखों की नईया तारी तारी हरि हरि॥ प्रभु के नाम का पारस जो छूले वो हो जाए सोना। दो अक्षर का शब्द हरि है, लकिन बड़ा सलोना। उसने संकट टाले भारी भारी हरि हरि॥ हरि का भजन करो हरि है तुम्हारा | हरि के भजन बिन, नहीं गुजारा || हरि नाम से तेरा काम बनेगा | हरि नाम ही तेरे साथ चलेगा || हरि नाम लेने वाला, हरि का है प्यारा || कोई काहे राधेश्याम, कोई काहे सीताराम | कोई गिरिधर गोपाल, कोई राधामाधव लाल | वोही हरि दीन बंधू, वोही करी करुना सिन्धु, नमो बारम्बारा || सुख़ दुःख भोगे जाओ, लेखा सब मिटाते जाओ | हरि गुण जाओ, हरि को रिझाते जाओ | वोही हरि दीन बंधू, वोही करी करुना सिन्धु, सब का है प्यारा || दीनो पर दया करो, बने तो सेवा भी करो | मोह सब दूर करो, प्रेम हरि ही से करो | यही भक्ति यही योग, यही ज्ञान सारा || जो भजे हरि को सदा, सोही परम पद पावेगा | देह के माला, तिलक और छाप, नहीं किस काम के, प्रेम भक्ति बिना नहीं नाथ के मन भावे | दिल के दर्पण को सफा कर, दूर कर अभिमान को, ख़ाक को गुरु के कदम की, तो प्रभु मिल जायेगा | छोड़ दुनिए के मज़े सब, बैठ कर एकांत में, ध्यान धर हरि का, चरण का, फिर जनम नही आयेगा | द्रिड भरोसा मन मे करके, जो जपे हरि नाम को, कहता है ब्रह्मानंद, बीच समाएगा |