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लाडपुर। गांव का इतिहास। हिस्ट्री। कहानी। बादली। #ladpur #village #itihas #histri #kahani #badli #india #apharan #news #school @bajrangbalifashionpointlad1495 @popikitchen @itihashumsabka752 @Histrix- @kajan8583 @Badlinu @BSbadlitv3559 @StvHaryanaNews1 बादली से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है लाडपुर गांव। लाडपुर गांव आज से लगभग 450 वर्ष पूर्व बादली से गए कोरा और मिंघा नामक व्यक्तियों ने बसाया था। लाडपुर गांव गुलिया खाप, जिला झज्जर, उपमंडल व तहसील बादली के अर्न्तगत आने वाला का गांव है। लाडप्रु हल्का बादली और रोहतक लोकसभा का गांव है। जिला मुख्यालय से लाडपुर गांव की दूरी लगभग 18 किलोमीटर है। गांव के बड़े बुजुर्गों का मानना है कि कोरा और मिंघा दोनों जहां कभी पहले बादली गांव बसता था और आज भी वहां पर दादा सारंग देव का प्रसिद्ध मंदिर है जिसे करेड़ा धाम बोला जाता है वहां से इस गांव की बसावट निकली। गांव में उपरोक्त दोनों व्यक्तियों कोरा मिंघा के नाम से गांव में दो पान्नें हैं। गांव में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विभिन्न खेलों के खिलाड़ी रहे हैं। गांव के लोग सेवा में अपनी सेवाएं सेना व अन्य प्रशासनिक पदो पर भी दे चुकें है या दे रहें है। गांव के लोग मुख्य रूप से खेती और पशुपालन करते है। इसके अलावा सरकारी व गैर सरकारी नौकरी व खुद के व्यवसाय से भी ग्रामीण बहुतायत में जुड़ें हुए है। गांव में एक प्रसिद्ध उरिबाली नामक जोहड़ है जिसमें मान्यता है कि नहाने से पीलिया का रोग समाप्त हो जाता है। इस जोहड़ में नहाने के लिए दूर-दराज से लोग आते हैं। लाडपुर गांव का इतिहास गौरवशाली रहा है। इस गांव के अनेक सैनिकों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने परिणामों का बलिदान दिया है। गांव के बड़े बुजुर्गों और ग्रामीणों का मानना है कि गांव में विभिन्न खेलों में खिलाड़ियों ने भी देश-प्रदेश और अर्न्राष्ट्ीय स्तर पर गांव का नाम रोशन किया है। कुश्ती के प्रति गांव में एक विशेष लगाव है। गांव में आज भी दो अखाड़े है जिनके पहलवानों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश, प्रदेश व क्षेत्र का नाम रौशन किया है। गांव शिक्षित और जागरूक व्यक्तियों का गांव है। गांव की लगभग 85 प्रतिशत आबादी पढ़ी-लिखी है। यहां के निवासियों ने पढ़ लिखकर विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए भी गांव का नाम रोशन किया है। कर्नल, पायलेट, एसडीएम, जज आदि पदों पर भी यहां के लोग रहे हैं या आज भी कार्यरत हैं। ग्रामीणों के अनुसार गांव में लगभग 700 मकान है। गांव 80 एकड़ में बसा हुआ है। गांव की आबादी लगभग 5000 की है। गांव में लगभग 2700 वोट हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में 11 जातियां आपसी भाईचारे और प्यार प्रेम के साथ निवास करती हैं। गांव में पांच चौपालें, एक स्टेडियम, एक अंबेडकर भवन, तीन मंदिर स्थापित हैं। इसके अलावा लगभग सभी सरकारी सुविधाएं गांव में मुहैया है। लाडपुर गांव में एक ग्राम पंचायत बनती है। गांव में 11 वार्ड में जिनमें एक सरपंच के साथ 11 पंच भी चुने जाते है। गांव के लोग दादा सारंगदेव को अपना कुल देवता मानते हैं। हर शुभ कार्य दादा सारंग देव के आशीर्वाद के साथ शुरू किया जाता है।