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श्री राधा रानी भजन राधा-राधा! राधा-राधा! राधा-राधा! राधा-राधा! मोहे मोर बनइयो राधा, अपने वृंदावन को; मैं नाच-नाच, कूद के तुमको रिझाऊंगी! मोहे बंदर बनइयो तो बनइयो, सेवा कुंज को; मैं कूद-फांद ब्रज में, जोर दिखाऊंगी! (मैं कूद-फांद ब्रज में, जोर दिखाऊंगी!) मोहे भिक्षुक बनइयो तो बनइयो, गोवर्धन को; मैं मांग-मांग टूक, ब्रजवासियों के खाऊंगी। मोहे रसिक बनइयो तो बनइयो, बरसाने को; मैं आठों याम—राधा, राधा, राधा नाम गाऊंगी! (मैं आठों याम—राधा, राधा, राधा नाम गाऊंगी!) राधा-राधा! राधा-राधा! राधा-राधा! राधा-राधा! मोहे तिलक बनइयो राधा, अपने मस्तक को; मैं तीनों लोकों के, सर का ताज बन जाऊंगी। मोहे कंठी बनइयो राधा, अपने गले की; मैं मीठो-मीठो बोल, जग अपनो बनाऊंगी! (मैं मीठो-मीठो बोल, जग अपनो बनाऊंगी!) मोहे कंगन बनइयो राधा, अपने हाथन को; मैं दुनिया में सबसे, अनमोल कहलाऊंगी। मोहे पायल बनइयो राधा, अपने पैरों की; मैं छम-छम कर, सारो ब्रज घूम आऊंगी! (मैं छम-छम कर, सारो ब्रज घूम आऊंगी!) राधा-राधा! राधा-राधा! राधा-राधा! राधा-राधा! मोहे लता बनइयो राधा, अपने निधिवन की; मैं झूम-झूम कृष्ण-राधा, रास देख पाऊंगी। मोहे जल बनइयो तो बनइयो, जमुना जी को; मैं ब्रज भूमि में, अमृत छलकाऊंगी! (मैं ब्रज भूमि में, अमृत छलकाऊंगी!) मोहे पेड़ बनइयो तो बनइयो, कदम को; मैं कान्हा के संग मिल, चीर चुराऊंगी! मोहे कंकर बनइयो तो बनइयो, नंदगांव को; मैं गोपियों की मटकी फोड़, माखन गिराऊंगी! (मैं गोपियों की मटकी फोड़, माखन गिराऊंगी!) राधा-राधा! राधा-राधा! राधा-राधा! राधा-राधा! मोहे कोयल बनइयो राधा, अपने बाग की; मैं दुनिया को मीठो-मीठो, राग सुनाऊंगी। मोहे फूल बनइयो राधा, अपनी माला को; मैं राधा-राधा बोल, सारो जग महकाऊंगी! (मैं राधा-राधा बोल, सारो जग महकाऊंगी!) मोहे संत बनइयो तो बनइयो, प्रेमंद से; मैं अपनो जीवन, राधा नाम पे लुटाऊंगी। मोहे दासी बनइयो राधा, अपने चरणन की; मैं राधा नाम के, भजन गाऊंगी! (श्री राधा नाम के, भजन गाऊंगी!) राधा-राधा! राधा-राधा! राधा-राधा! राधा-राधा! मोहे मोर बनइयो राधा, अपने वृंदावन को; मैं नाच-नाच, कूद के तुमको रिझाऊंगी! मोहे बंदर बनइयो तो बनइयो, सेवा कुंज को; मैं कूद-फांद ब्रज में, जोर दिखाऊंगी! (मैं कूद-फांद ब्रज में, जोर दिखाऊंगी!) राधा-राधा! राधा-राधा! राधा-राधा...