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संबल ______ सोच रहा, कुछ गा न रहा मैं। निज सागर को थाह रहा हूँ, खोज गीत में राह रहा हूँ, पर, यह तो सब कुछ अपने हित, औरों को समझा न रहा मैं। वातायन शत खोल हृदय के, कुछ निर्वाक खड़ा विस्मय से, उठा द्वार-पट चकित झाँक अपनेपन को पहचान रहा मैं। ग्रन्थि हृदय की खोल रहा हूँ, उन्मन-सा कुछ बोल रहा हूँ, मन का अलस खेल यह गुनगुन, सचमुच, गीत बना न रहा मैं। देखी दृश्य-जगत की झाँकी, अब आगे कितना है बाकी़ ? गहन शून्य में मग्न, अचेतन, कर अगीत का ध्यान रहा मैं। चरण-चरण साधन का श्रम है, गीत पथिक की शान्ति परम है, ये मेरे संबल जीवन के, जग का मन बहला न रहा मैं। एक निरीह पथिक निज मग का मैं न सुयश-भिक्षुक इस जग का, अपनी ही जागृति का स्वर यह, बन्धु, और कुछ गा न रहा मैं। सोच रहा, समझा न रहा मैं। written by Ramdhari Singh Dinkar @Voice365 भावार्थ : “संबल” – रामधारी सिंह दिनकर @Voice365 कवि कहता है कि वह इस समय गाने या संसार को रिझाने के लिए शब्द नहीं रच रहा, बल्कि अपने ही भीतर उतरकर स्वयं को समझने का प्रयत्न कर रहा है। वह अपने अंतःसागर की गहराई नाप रहा है और गीत के माध्यम से जीवन की सही राह खोज रहा है। यह साधना निजी है, इसलिए इसे वह दूसरों को समझा नहीं पा रहा। हृदय के सभी वातायन खोलकर कवि विस्मय में खड़ा है और अपने भीतर छिपे ‘अपनेपन’ को पहचान रहा है। वह हृदय की गाँठें खोल रहा है, मन की उलझनों को सुलझा रहा है, पर जो गुनगुनाहट भीतर चल रही है, वह अभी पूर्ण गीत का रूप नहीं ले पाई है। संसार के दृश्यों को देख लेने के बाद कवि अब यह प्रश्न करता है कि आगे और कितना देखना शेष है। वह गहन शून्य में डूबकर अगीत का ध्यान कर रहा है—जहाँ शब्द नहीं, केवल अनुभूति है। कवि के अनुसार जीवन का हर चरण साधना और श्रम से भरा है, और गीत पथिक के लिए परम शांति का साधन है। यही उसके जीवन के सच्चे संबल हैं। वह जगत् का मनोरंजन नहीं करना चाहता, न ही यश की भीख माँगता है। वह स्वयं को अपने मार्ग का एक निरीह पथिक मानता है, जो केवल अपनी जागृति की आवाज़ सुन रहा है। उसकी यह कविता आत्मचिंतन, आत्मबोध और आंतरिक साधना का स्वर है—जिसमें गाना नहीं, समझना प्रमुख है। @Voice365 Ramdhari Singh Dinkar Dinkar ki kavita Sambal Kavita Sambal Poem Meaning Sambal Dinkar Poem Hindi Kavita Hindi Poetry Rashtrakavi Dinkar Dinkar Best Poems Dinkar Kavita Path Dinkar Kavita Voice Hindi Poem Recitation Hindi Kavita Vachan Hindi Sahitya Adhyatmik Kavita Atmachintan Kavita Jeevan Darshan Kavita Darshanik Kavita Motivational Hindi Poem Inspirational Hindi Poetry Self Realization Poem Inner Journey Poetry Deep Meaning Hindi Poem Soul Searching Poetry Hindi Literature Classics Voice 365 Voice365 Hindi Poetry #RamdhariSinghDinkar #SambalKavita #DinkarPoetry #HindiKavita #HindiPoetry #RashtrakaviDinkar #DinkarJi #HindiSahitya #ClassicalHindiPoetry #Atmachintan #AatmaChintanKavita #JeevanDarshan #DarshanikKavita #AdhyatmikKavita #SelfRealization #InnerJourney #SoulSearching #DeepMeaningPoetry #ThoughtProvokingPoetry #MotivationalHindiPoetry #InspirationalPoem #PoetryRecitation #HindiKavitaPath #KavitaVachan #Voice365 #Voice365Poetry #HindiLiterature #EvergreenPoetry