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नागक्षेत्र। सफीदों में स्थित इस क्षेत्र पर काफी मान्यता है। नवरात्र के दिनों में यहां सैकड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। Nagkshetra Safidon Temples in Jind| सांपों का सर्वनाश | पांचों बावरियों का चमत्कारी स्थान सफीदों धाम राजा परीक्षित एक दिन उदास थे। उन्होंने अपनी उदासी को दूर करने के लिए वह शिकार करने के लिए जंगलों में गए। परीक्षित को वहां एक स्थान पर शभीक ऋषि तपस्या करते मिले। शभीक मुनि राजा परीक्षित को महत्व न देकर अपनी तपस्या के लीन रहे। राजा परीक्षित ने इसे अपना अपमान समझा तथा वहीं पर पड़े हुए एक मृत सांप को उठाकर तपस्या कर रहे शभीक मुनि के गले में डाल दिया। परीक्षित के इस कार्य पर मुनि पुत्र ने क्रोधित होकर राजा परीक्षित का श्राप दिया कि आज से सातवें दिन यही मरा हुआ सांप जीवित होकर राजा को डंसेगा। परीक्षित ने मुनि पुत्र के श्राप से बचने के लिए भरकम प्रयास व उपाय किए, लेकिन राजा परीक्षित की मौत बताई गई समयावधि में ही हो गई थी। उसके बाद राजा परीक्षित के पुत्र जन्मेजय ने अपने पिता की मौत का बदला लेने के लिए प्रतिज्ञा ली। जन्मेजय ने अपनी प्रतिज्ञा में कहा कि वह पृथ्वी से समस्त सर्प जाति का विनाश कर देगा। जन्मेजय ने बदला लेने के लिए सफीदों के इसी क्षेत्र में सर्प विनाश की खातिर सर्प दमन यज्ञ का आयोजन किया, जहां आज नागक्षेत्र है। इससे मंत्रोच्चारण के प्रभाव से पृथ्वी के समस्त सर्प वहां आकर गिरने लगे व धू-धू करके जलने लगे। अंत में एक तक्षक नाग ही शेष बचा, जिसे बाद में राजा इंद्र द्वारा प्रार्थना करने पर भगवान शिव के आशीर्वाद से ही बचाया जा सका। इसके बाद से इस क्षेत्र की काफी मान्यता है और हजारों श्रद्धालु यहां पूजा के लिए आते है। उत्तरी छोर पर एक अन्य तीर्थ स्थित नागक्षेत्र के उत्तरी छोर पर एक अन्य तीर्थ भी स्थित है। हंसराज नामक इस तीर्थ के संबंध में कहा जाता है कि महाभारत के युद्ध के दौरान गरवरिक योद्धा का भगवान श्रीकृष्ण द्वारा सिर काटने के बाद यहां टीले पर यह सिर स्थापित किया गया और इच्छा वरदान के अनुसार उसने सारा महाभारत का युद्ध यहां से देखा। युद्ध के बाद भगवान श्रीकृष्ण को उसने बताया कि उसने युद्ध में भगवान का सुदर्शन चक्र और द्रोपदी का खपर ही क्रियान्वित होते देखा है। पांचों बावरियों का चमत्कारी स्थान सफीदों धाम इतिहास:- शूरवीर पांच बावरियों का इतिहास बताने जा रहा हूं ।काली से 64 जोगनी और गोगा जी चौहान से 56 कल्बे प्राप्त कर अपने सिद्ध कमान से और प्रजा के कष्टों का निवारण कर अमर हो गई ।और जिनकी मानता मुरथल धाम स्थित दमदम और गोगामेडी दरबारों में होती है ,और इन पांचो बावरियों का आशीर्वाद प्राप्त कर भक्तजन अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं ।पांचो बावरियों इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है पांचो बावरियों जब खरखड़ी नामक स्थान राजस्थान में 979 वर्ग में विशाल प्रमिला फैला हुआ था ।मुक्त रूप में पूरा कबीला बहुत खुशहाल जीवन व्यतीत कर रहा था राजा का नाम था । हेमराज बाबरी जो एक न्याय प्रिय राजा थे, और वह दूसरों की मदद करने वाले व्यक्ति थे लेकिन इतना विशाल और खुशहाल राज्य होते हुए भी उनकी कोई संतान नहीं थी । राजा हेमराज बावरे बहुत दुखी और चिंतित रहते थे ।उसका मुख्य कारण था कि उनके कोई संतान नहीं थी ।हेमराज बावरी की धर्मपत्नी माता को बहुत बड़ी शिव भक्ति नगरी में आए साधु संतों और गरीब प्रजा की मदद करने में लिए रहती थी । Hi guys welcome back to another new video to Swagat hai aap sabhi ko ek or new video ke andar #ashishsonivlogs #vlogs #vlogging Hey YouTube friends, Ashish Soni this side and thank a lot for watching my videos. Please "LIKE" the video if you enjoyed watching or also "COMMENT" if you want to Suggest something else so please do share. Instagram:- / ashishsonivlogs23 Facebook:- / ashishsonivlogs Thank you so much.