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सन्तुष्टमणि बन लाइट फैलाएँ, बापदादा का संदेश सुनाएँ। सन्तुष्ट रहें, सबको सन्तुष्ट करें, विश्व में खुशियों के दीप जलाएँ॥ (अंतरा 1) जहाँ सन्तुष्टता, वहाँ कमी नहीं, हर प्राप्ति है, कोई घटी नहीं। चेहरे से झलके शान्ति की धारा, नयनों से बहे प्रेम का तारा॥ माया, प्रकृति पपेट शो लगे, साक्षी बन हर दृश्य बदल जाए॥ सन्तुष्टमणि बन लाइट फैलाएँ… (अंतरा 2) सदा शब्द ही जीवन का गहना, कभी-कभी से अब दूर ही रहना। डबल लाइट बन उड़ते जाएँ, हर परिस्थिति पर विजय पाएं॥ शुभ भावना, शुभ कामना रखें, व्यर्थ संकल्पों से सदा बच जाएँ॥ सन्तुष्टमणि बन लाइट फैलाएँ… (अंतरा 3) मीठे बोल हों, मुस्कान सजी, वाणी बने सेवा की शक्ति। फूलों-सी वर्षा मुख से हो, हर आत्मा में परिवर्तन हो॥ चलन-चेहरे से सेवा करें, प्रैक्टिकल जीवन आदर्श बनें॥ सन्तुष्टमणि बन लाइट फैलाएँ… (अंतरा 4) मैं आत्मा, मेरा बाबा साथ, कम्बाइन्ड रूप में हर पल याद। आज ब्राह्मण, कल देवता हैं, हम ही कल्प-कल्प के अधिकारी हैं॥ स्वराज्य का नशा सदा रहे, पुरानी दुनिया स्वतः बिसर जाए॥ सन्तुष्टमणि बन लाइट फैलाएँ… (अंतरा 5) अशरीरी बनने का अभ्यास करें, हलचल में भी अचल रहें। एक सेकण्ड में स्थिति बदलें, बाबा के संग आगे चलें॥ सकाश देकर विश्व जगाएँ, दुख हर्ता, सुख कर्ता कहलाएँ॥ सन्तुष्टमणि बन लाइट फैलाएँ… (अंतिम पंक्तियाँ) हम हैं विजयी माला के मणके, बाप के दिल के अनमोल रत्न। सन्तुष्टता की लाइट लिए, नव विश्व का निर्माण करें॥ 🎶 सन्तुष्टमणि बन लाइट फैलाएँ… 🎶