У нас вы можете посмотреть бесплатно 🌸Gaura Purnima Special day 10 🌸 Gaura Kṛpā Pravāh /Gaura Nāma /Gaura Dhām / Gaura Rūpa-Līlā . или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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🌸 गौर कृपा प्रभाव | चैतन्य दर्शन – चेतोदर्पण मार्जनम् सत्र श्रृंखला | दिवस 10 🌸 हरि कृष्णा। आज गौर कृपा प्रभाव – चेतोदर्पण मार्जनम् सत्र श्रृंखला के दिवस 10 में हमने नवद्वीप धाम के दो दिव्य द्वीपों — जाह्नुद्वीप और मोदद्रुमद्वीप (महाद्रुमद्वीप) की महिमा का श्रवण किया। (1) जाह्नुद्वीप की महिमा – वंदनम् सबसे पहले हमने जाह्नुद्वीप की महिमा को जाना, जो नवधा भक्ति के “वंदनम्” अंग का प्रतिनिधित्व करता है। इस स्थान का नाम महर्षि जाह्नु के कारण पड़ा। जब भगीरथ महाराज गंगा जी को स्वर्ग से पृथ्वी पर लेकर आ रहे थे, तब गंगा का प्रवाह बहुत तीव्र था और वह जाह्नु मुनि के आश्रम को स्पर्श करती हुई आगे बढ़ने लगी। तब जाह्नु मुनि ने अपने तपोबल से सम्पूर्ण गंगा को पी लिया। बाद में भगीरथ महाराज ने विनम्र होकर उनसे प्रार्थना की, तब मुनि ने अपनी देह से पुनः गंगा जी को प्रकट किया। इसी कारण गंगा जी को “जाह्नवी” भी कहा जाता है और इस स्थान का नाम जाह्नुद्वीप पड़ा। यहीं पर जाह्नु मुनि ने तपस्या करते हुए कलियुग में आने वाले स्वर्णिम अवतार — श्री चैतन्य महाप्रभु — का ध्यान किया, जिससे प्रसन्न होकर महाप्रभु ने उन्हें दर्शन दिए। (2) मोदद्रुमद्वीप (महाद्रुमद्वीप) की महिमा – सख्यम् इसके बाद हमने मोदद्रुमद्वीप (महाद्रुमद्वीप) की महिमा का श्रवण किया, जो नवधा भक्ति के “सख्यम्” अंग का प्रतिनिधित्व करता है। “मोद” का अर्थ है आनंद और “द्रुम” का अर्थ है वृक्ष। यह स्थान आनंदमय दिव्य वृक्षों से युक्त होने के कारण मोदद्रुमद्वीप कहलाता है। त्रेतायुग में भगवान श्री रामचंद्र अपने वनवास के समय सीता माता और लक्ष्मण जी के साथ यहाँ पधारे थे। उन्होंने एक वट वृक्ष के नीचे कुटिया बनाकर कुछ समय यहाँ निवास किया। उसी समय भगवान राम ने मुस्कुराते हुए सीता माता से कहा कि कलियुग में वे श्री चैतन्य महाप्रभु के रूप में स्वर्णिम अवतार लेकर इसी धाम में प्रकट होंगे और हरिनाम संकीर्तन के माध्यम से सभी जीवों को कृष्ण प्रेम प्रदान करेंगे। इस प्रकार यह स्थान भगवान के साथ मित्रता और प्रेमपूर्ण संबंध (सख्य भाव) का संदेश देता है। (3) आज का भजन आज के सत्र के अंत में हमने अत्यंत करुणामयी भजन — “परम करुणा बहु दुविजना, निताई गौरचंद्र…” का कीर्तन किया, जो श्री लोचनदास ठाकुर द्वारा रचित है। इस भजन के माध्यम से हमने श्री नित्यानंद प्रभु और श्री गौरांग महाप्रभु की असीम करुणा का स्मरण किया और उनके चरणों में प्रार्थना की कि वे हम सभी को हरिनाम में स्थिर और शुद्ध भक्ति प्रदान करें। हरे कृष्ण। 🙏🌼