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नमस्ते दोस्तों प्रस्तुत है शरत चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखा गया उपन्यास "श्रीकांत"। यह उपन्यास शरत जी के एक बंगाली उपन्यास "श्रीकांतो" का हिंदी अनुवाद है। "श्रीकांत" एक आत्मकथतमक शैली में लिखी गयी कहानी है जिसमे नायक श्रीकांत को एक घुम्मकड़ पथिक के रूप में दर्शाया गया है ,अगर कोई उसे अपने वश में कर पाया तो वो होती है उसकी बचपन की सहपाठिनी राजलक्ष्मी। अगर आप भावनात्मक उथल-पुथल, दुविधा, प्यार, दोस्ती, वर्जना, यादें, नुकसान और अपने आप को खोजने के साथ एक महान साहसिक कार्य करना चाहते हैं तो इस उपन्यास को मेरे चैनल पर जरूर सुने। कहानी लम्बी होने के कारण मैं इसे कुछ भागों में प्रस्तुत करुँगी। आपके सहयोग और प्यार की आशा करती हूँ। चार भागों में विभाजित, श्रीकांत को सोलह वर्षों से अधिक की अवधि में लिखा गया था। तीसरे भाग के अंतिम तीन अध्यायों को छोड़कर, पहले तीन भागों को श्रीकांतार भ्रामण कहिनी (लिट्ल ऑफ द टेल ऑफ श्रीकांता वांडरिंग्स) शीर्षक के तहत एक मासिक पत्रिका भारतवर्ष में प्रसारित किया गया था। जबकि चौथे भाग को एक अन्य मासिक पत्रिका बिचित्र में प्रसारित किया गया था, जिसमें थोड़ा बदला हुआ नाम था श्रीकांत चतुर्थ परिबा। उपन्यास के पहले तीन हिस्सों को एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया गया था, जिसमें संशोधित शीर्षक क्रमशः 1917, 1918 और 1927 में था। चौथे को 1933 में एक पुस्तक के रूप में लघु शीर्षक श्रीकांता के साथ प्रकाशित किया गया था, और शरत चंद्र के महान कार्य के रूप में प्रशंसित किया गया था शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय (१५ सितम्बर, १८७६ - १६ जनवरी, १९३८) बांग्ला के सुप्रसिद्ध उपन्यासकार एवं लघुकथाकार थे। वे बांग्ला के सबसे लोकप्रिय उपन्यासकार हैं। उनकी अधिकांश कृतियों में गाँव के लोगों की जीवनशैली, उनके संघर्ष एवं उनके द्वारा झेले गए संकटों का वर्णन है। इसके अलावा उनकी रचनाओं में तत्कालीन बंगाल के सामाजिक जीवन की झलक मिलती है। शरतचंद्र भारत के सार्वकालिक सर्वाधिक लोकप्रिय तथा सर्वाधिक अनूदित लेखक हैं। शरत्चन्द्र ने अनेक उपन्यास लिखे जिनमें पंडित मोशाय, बैकुंठेर बिल, मेज दीदी, दर्पचूर्ण, श्रीकान्त, अरक्षणीया, निष्कृति, मामलार फल, गृहदाह, शेष प्रश्न, दत्ता, देवदास, बाम्हन की लड़की, विप्रदास, देना पावना आदि प्रमुख हैं। बंगाल के क्रांतिकारी आंदोलन को लेकर "पथेर दावी" उपन्यास लिखा गया। पहले यह "बंग वाणी" में धारावाहिक रूप से निकाला, फिर पुस्तकाकार छपा तो तीन हजार का संस्करण तीन महीने में समाप्त हो गया। इसके बाद ब्रिटिश सरकार ने इसे जब्त कर लिया। शरत के उपन्यासों के कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद हुए हैं।शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय वैसे तो स्वयं को बंकिमचन्द्र चटर्जी और रवीन्द्रनाथ ठाकुर के साहित्य से प्रेरित बताते थे लेकिन उनके साहित्य ने समाज के निचले तबके को पहचान दिलाई। मुंशी प्रेमचंद कहानियां सुनने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें :-(Listen other stories of Premchand ) • Munshi Premchand शरत चंद्र चट्टोपाध्याय की कहानियां सुनने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें :-(Sharat Chandra Stories ) • Sharat Chandra Chattopadhyay Stories बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय /चटर्जी की कहानियां सुनने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें :-(Bnakim Chandra Stories) • Bankim Chandra Chatterjee/Chattopadhyay Visit my Playlist :- / @inspiredcorner My other channel is all about art & paintings .Reach the channel by clicking the link below :(SassyArt) • Pichwai Painting | How to make Lotus ... To see "Srikant" painting (on my Art channel:SasstArt) plz visit this link :- श्रीकांत की पेंटिंग देखने के लिए मेरे आर्ट चैनल को ज़रूर देखें :) • @SassyArt Color Pencil Drawing for be... #SharatChandraChattopadhyay #SriKant Part-1 #AudioBook #HindiKahaniyan