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सामूहिक चेतना, प्रकृति का रौद्र रूप और कर्मों का गूढ़ विज्ञान: एक सम्पूर्ण विश्लेषण जब किसी घटना को बहुत ज्यादा फैलाया जाता है और लाखों लोग एक साथ आक्रोश, नफरत या प्रतिशोध से भर जाते हैं, तो वह केवल एक सामाजिक प्रतिक्रिया नहीं होती। उस समय भौतिक, मनोवैज्ञानिक और रूहानी स्तर पर एक बहुत बड़ा ब्रह्मांडीय चक्र शुरू हो जाता है। आइए इस पूरे रहस्य को परत-दर-परत समझते हैं। 1. भीड़ की मानसिकता का विज्ञान (The Science of Mob Mentality) जब दुनिया शोर मचा रही हो, तो अच्छे-खासे समझदार लोग भी अपनी तार्किक क्षमता क्यों खो देते हैं? इसके पीछे गहरे वैज्ञानिक कारण हैं: एमीग्डाला हाईजैक (Amygdala Hijack): जब कोई भड़काने वाली खबर फैलती है, तो हमारे मस्तिष्क का डर और भावनाओं का केंद्र (Amygdala) हावी हो जाता है। यह हमारे तार्किक दिमाग (Prefrontal Cortex) को पूरी तरह से 'स्विच ऑफ' कर देता है। मिरर न्यूरॉन्स (Mirror Neurons): हमारे दिमाग के ये न्यूरॉन्स दूसरों की भावनाओं की नकल करते हैं। जब हम हज़ारों लोगों को गुस्से में देखते हैं, तो न चाहते हुए भी 'इमोशनल कंटेजियन' (भावनाओं के वायरस) के शिकार हो जाते हैं। 2. सामूहिक बद्दुआ और श्राप का विनाशकारी प्रभाव चाहे कोई कितना भी बड़ा पापी क्यों न हो, जब लाखों लोग उसे सामूहिक रूप से बद्दुआ देते हैं ("इसे फांसी दो", "यह बर्बाद हो जाए"), तो न्याय नहीं होता, बल्कि एक भयंकर नकारात्मक ऊर्जा का निर्माण होता है। डॉ. मसारू इमोटो का विज्ञान: उनके प्रयोगों ने साबित किया कि नफरत भरे शब्दों से पानी के क्रिस्टल विकृत और डरावने हो जाते हैं। चूंकि हम और हमारी पृथ्वी 70% पानी हैं, सामूहिक नफरत सीधे हमारे शरीर और वायुमंडल को ज़हरीला बना देती है। पापी पर प्रभाव: जो आत्मा पहले से ही अंधकार (तमोप्रधान स्थिति) में है, वह सामूहिक बद्दुआओं से सुधरती नहीं, बल्कि और अधिक क्रूर, ढीठ और पत्थरदिल बन जाती है। स्वयं पर प्रभाव: किसी को श्राप देना सुलगते हुए कोयले को पकड़ने के समान है। इससे सबसे पहले हमारे अपने पवित्र संस्कार दूषित होते हैं और हमारी आंतरिक शांति (Soul Power) खत्म हो जाती है। 3. यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे: प्रकृति का रौद्र रूप हमारी चेतना और प्रकृति के पाँच तत्वों के बीच एक सीधा 'वायरलेस कनेक्शन' है। प्रकृति कोई अलग चीज़ नहीं, बल्कि हमारी आंतरिक स्थिति का ही बाहरी दर्पण है। अग्नि तत्व: इंसानों के भीतर का सामूहिक क्रोध और नफरत प्रकृति में भयंकर गर्मी, जंगलों की आग और ज्वालामुखियों के रूप में प्रकट होता है। जल तत्व: काम-विकार, गहरा दुख और अनियंत्रित भावनाएं प्रकृति में विनाशकारी बाढ़, सूनामी और ग्लेशियरों के पिघलने का रूप ले लेती हैं। वायु तत्व: विचारों का भटकाव और मानसिक उथल-पुथल भयंकर तूफानों और चक्रवातों (Cyclones) को जन्म देती है। पृथ्वी तत्व: जब इंसान का अहंकार और जड़ता बढ़ जाती है, तो पृथ्वी माता की सहनशक्ति टूटती है, जो विनाशकारी भूकंपों के रूप में सामने आती है। आकाश तत्व: सामूहिक डर और स्वार्थ वायुमंडल को प्रदूषित कर नई-नई महामारियों (Pandemics) को जन्म देते हैं। 4. कर्मों का रहस्यमयी गणित (The Mystical Mathematics of Karma) ब्रह्मांड का यह ऑटोमैटिक अकाउंटिंग सिस्टम आम गणित से बिल्कुल अलग है: Negative (-) + Negative (-) = भयंकर कार्मिक बंधन: किसी ने बुरा किया और आपने पलटकर बद्दुआ दी। यह आग से आग बुझाने जैसा है, जिससे जन्म-जन्मांतर का दुख का चक्र शुरू होता है। Negative (-) + Positive (+) = कर्मों का चुक्तू (Settlement): पापी ने पाप किया, लेकिन आपने उसे साक्षी भाव से देखा और क्षमा (शुभ भावना) की। यहाँ कार्मिक खाता 'ज़ीरो' हो जाता है और आप मुक्त हो जाते हैं। मल्टीप्लिकेशन का नियम (1 बीज = अनंत फल): बोया गया एक छोटा सा नकारात्मक विचार या कर्म समय की ज़मीन में जाकर दुख का पूरा 'वृक्ष' बन जाता है। शून्य से गुणा (Intention matters): बाहरी कर्म चाहे 100% सही दिखे, लेकिन अगर अंदर भावना (Intention) स्वार्थ की है (यानी 0), तो कुल पुण्य शून्य (100 × 0 = 0) ही रहता है। योगग्नि (The Power of Nullification): यह सबसे बड़ा नियम है। परमपिता की स्मृति (राजयोग ध्यान) की सर्वोच्च फ्रीक्वेंसी में जन्म-जन्मांतर के भारी से भारी पाप कर्म भी जलकर भस्म (Nullify) हो जाते हैं। 5. ऐसे समय में हमारी सर्वोच्च ज़िम्मेदारी जब पूरा विश्व-नाटक (World Drama) अज्ञानता और नफरत के अंधेरे में हो, तब हमारी ज़िम्मेदारी भीड़ का हिस्सा बनने की नहीं है। साक्षी भाव (Detached Observer): दुनिया के नाटक को बिना विचलित हुए देखें। न्याय करना कर्मों की सत्ता का काम है, हमारा नहीं। सकाश देना (Radiating Pure Vibrations): यह सबसे बड़ी विश्व सेवा है। एकांत में बैठकर, सुप्रीम सोर्स से जुड़कर, तड़पती हुई आत्माओं और विचलित प्रकृति के पाँचों तत्वों को शांति, प्रेम और रहम की शक्तिशाली किरणें (सकाश) दें। लाइटहाउस बनना: जब हर तरफ डर और बेचैनी हो, तब अपने शांत चेहरे, स्थिर मन और शुभ भावना से भटकती आत्माओं को सुकून का रास्ता दिखाएं। अंधेरे को सिर्फ रोशनी से ही मिटाया जा सकता है। #LawOfKarma #PrakritiKaRaudraRoop #Karma #BKSantosh #MysteryRevealed #BrahmaKumaris #PowerOfThoughts #MobMentality #CollectiveConsciousness #Spirituality #SpiritualAwakening #KarmaPhilosophy #KarmaQuotes #PsychologyFacts #MindPower