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“कानों में कँगना” प्रसिद्ध लेखक राधिका रमण प्रसाद सिंह की एक रोचक और व्यंग्यपूर्ण कहानी है। इस कहानी में मानव स्वभाव, जिज्ञासा और छोटी-सी बात के बढ़ते हुए प्रभाव को बहुत ही सरल और मनोरंजक ढंग से दिखाया गया है। कहानी की शुरुआत एक साधारण से प्रश्न से होती है—किसी के कानों में कँगना देखकर लोग आश्चर्य करते हैं और धीरे-धीरे यह बात पूरे समाज में चर्चा का विषय बन जाती है। लेखक ने इस छोटी-सी घटना के माध्यम से यह दिखाया है कि लोग अक्सर बिना सच्चाई जाने ही बातें फैलाने लगते हैं। कहानी व्यंग्य और हास्य के माध्यम से समाज की मानसिकता और अफवाहों की प्रवृत्ति को उजागर करती है। यह कहानी हमें यह शिक्षा देती है कि किसी भी बात पर विश्वास करने से पहले उसकी सच्चाई जानना जरूरी होता है, क्योंकि छोटी-सी अफवाह भी बड़ी चर्चा का रूप ले सकती है।