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मन मानसरोवर न्हान रे | Man Mansarovar Nhan Re | Kabir Amritvani Bhajan | Nirgun Bhajan संत कबीर परंपरा की यह गहन अमृतवाणी “मन मानसरोवर न्हान रे” बाहरी कर्मकांड के स्थान पर अंतरात्मा की शुद्धि का संदेश देती है। भजन में बताया गया है कि सच्चा स्नान किसी तीर्थ के जल से नहीं, बल्कि मन के मानसरोवर को निर्मल करने से होता है। यह निर्गुण भजन जीव के चौरासी लाख योनियों के चक्र, माया, अज्ञान और शब्द-साधना की गूढ़ व्याख्या करता है। सच्चे सतगुरु के शब्द से ही आत्मा का उद्धार संभव है—यही इस भजन का मूल संदेश है। 🙏 इस अमृतवाणी को ध्यानपूर्वक सुनें और मन को निर्मल करने का प्रयास करें। 📌 Channel: Kabir Amritvani Bhajan 📌 Genre: Nirgun Bhajan / Santvani / Kabir Vani 📌 Language: Hindi अगर यह भजन आपको आत्मचिंतन की ओर ले जाए 👉 Like करें 👉 Channel Subscribe करें 👉 और इस ज्ञानवाणी को Share करें ____________ Lyrics:- मन मानसरोवर न्हान रे। जल के जंतु रहै जल मांहीं, आठौं बखत बिहान रे, आठौं बखत बिहान रे। लख चौरासी जल के बासी, भ्रमें चार्यौं खान रे। चेतन होय कर जड़ कूँ पूजैं, गांठ बांध पषान रे। मन मानसरोवर न्हान रे। जल के जंतु रहै जल मांहीं, आठौं बखत बिहान रे, आठौं बखत बिहान रे। मरकब कहां चंदन के लेपैं, क्या गंग न्हावावें श्वान रे। सूधी होय न पूँछ तास की, छोड़त नाहीं बान्य रे। मन मानसरोवर न्हान रे। जल के जंतु रहै जल मांहीं, आठौं बखत बिहान रे, आठौं बखत बिहान रे। द्वादष कोटि जहां जम किंकर, बड़े बड़े दैत्य हैवान रे। धर्मराय की दरगह मांहीं, हो रही खैंचा तान रे। मन मानसरोवर न्हान रे। जल के जंतु रहै जल मांहीं, आठौं बखत बिहान रे, आठौं बखत बिहान रे। लख चौरासी कठिन त्रासी, बचन हमारा मान रे। जैसे लोह तार जंती में, ऐसे खैंचें प्रान रे। मन मानसरोवर न्हान रे। जल के जंतु रहै जल मांहीं, आठौं बखत बिहान रे, आठौं बखत बिहान रे। जूनी संकट मेट देत हैं, शब्द हमारा मान रे। हरदम जाप जपौ हरि हीरा, चलना आंब दिवान रे। मन मानसरोवर न्हान रे। जल के जंतु रहै जल मांहीं, आठौं बखत बिहान रे, आठौं बखत बिहान रे। सुरग रसातल लोक कुसातल, रचे जमीं असमान रे। चौदह तबक किये छिन मांहीं, सृजे शशि अरु भान रे। निर्गुण नूर जहूर जुहारो, निरख परख प्रवान रे। गरीबदास निज नाम निरंतर, सतगुरु दीन्हा दान रे। सतगुरु दीन्हा दान रे… आठौं बखत बिहान रे… मन मानसरोवर न्हान रे… kabir amritvani, kabir bhajan, sant kabir das, kabir dohe, kabir vani songs, kabir amritwani full, kabir ke dohe lyrics, devotional songs hindi, bhakti geet kabir, nirgun bhakti, sant kabir amrit vachan, kabir das ji bhajan, kabir gyan geet, spiritual bhajan 2025, kabir amritvani vol 1