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"श्री हनुमान महिमा एवं स्तुति" (Shri Hanuman Mahima & Stuti)| @Ajeymjimusic |2026 Jai shree Ram प्रथम श्लोक: माता अंजना के गर्भ से उत्पन्न, केसरी के पुत्र और वानरों के स्वामी हनुमान जी, जिनका मुख उदय होते हुए सूर्य के समान लाल है और जिनके मुख की कांति देखकर स्वयं सूर्य भी चकित (त्रस्त) रह गए। द्वितीय श्लोक: जब हनुमान जी अपनी शक्तियों को भूल गए थे, तब जाम्बवान जी ने उन्हें जगाया। जिसके बाद वे गरजते हुए विशाल समुद्र को लाँघकर लंका की ओर बढ़े। तृतीय श्लोक (अतुलितबलधामं): वे अपार बल के धाम हैं, जिनका शरीर स्वर्ण पर्वत (सुमेरु) के समान विशाल है। वे राक्षसों रूपी वन को भस्म करने वाले अग्नि हैं, ज्ञानियों में सर्वोपरि हैं और श्री राम के सबसे प्रिय भक्त हैं। चतुर्थ श्लोक: अशोक वाटिका में शोक से व्याकुल माता जानकी (सीता जी) को उन्होंने श्री राम का संदेश सुनाया और उन्हें शुभ मुद्रिका (अंगूठी) भेंट की। पंचम श्लोक: उन्होंने भीम (विशाल) रूप धारण कर लंका को तहस-नहस कर दिया और रावण के पुत्र अक्षय कुमार का वध कर रावण को भी आश्चर्यचकित कर दिया। षष्ठ श्लोक: दोषों का नाश करने वाले, लक्ष्मण जी के प्राण बचाने वाले और द्रोणागिरी पर्वत को उठाने वाले पवनपुत्र हनुमान जी की मैं वंदना करता हूँ। सप्तम श्लोक: पूरी लंका नगरी को जीतकर और राक्षसों का संहार कर हनुमान जी प्रभु श्री राम के हृदय से लग गए। ऐसे प्रभु हनुमान जी की जय हो। अंतिम श्लोक: जहाँ-जहाँ भगवान श्री राम का कीर्तन होता है, वहाँ हनुमान जी हाथ जोड़कर, आँखों में (प्रेम के) आँसू भरकर उपस्थित रहते हैं। ऐसे राक्षसों का अंत करने वाले मारुति को मैं नमन करता हूँ। lyrics: Ajay maurya music: Ai master director: ajey mji music my Instagram ID: https://www.instagram.com/invites/con... aap sabhi ko ram ram 🙏🙏🙏