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कीनू की खेती कसे करे how to do kinnu farming kinnu ki kheti kase kare eran tha money kinnu किन्नू की खेती उपोष्ण जलवायु वाले क्षेत्रो की जाती है, यानि की अर्द्ध-शुष्क जलवायु अच्छी रहती है अर्थात किन्नू का पौधा 10 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान में अच्छा पनपता है| यह सर्दियों में बहुत कम तापमान तथा गर्मियों में अधिक तापमान सह सकता हैं| की खेती अनेक प्रकार की मिट्टी, जैसे कि रेतली-दोमट से चिकनी-दोमट या गहरी चिकनी-दोमट या तेज़ाबी मिट्टी में की जा सकती है| लेकिन इसके लिए गहरी जल निकासी वाली दोमट व उपजाऊ भूमि जिसमें 2 मीटर गहराई तक किसी प्रकार की सख्त परत नहीं हो उपयुक्त रहती है किन्नू की बागवानी के लिए 6 x 6 या 5 x 6 मीटर की दूरी (कतार से कतार व पौधे से पौधा) पर लगाए जाते है| इस प्रकार पौधो की संख्या करीब 210 से 256 पौधे प्रति हेक्टेयर रहेगी| लेकिन किन्नू के सघन पौधे के बाग लगाकर भूमि का उचित प्रयोग किया जा सकता है किन्नों- यह किन्नू की उत्तर भारत की मुख्य फसल है| इसके फल सुनहरी-संतरी रंग के होते है और रस मीठा होता है| इसके फल हल्के खट्टे और स्वादिष्ट होते हैं| किन्नू की खेती के लिए 1 से 3 साल के पौधे को 15 से 30 किलोग्राम गोबर की खाद, 250 से 750 ग्राम यूरिया प्रति पौधा डालें| 4 से 7 साल के पौधे को 50 से 80 किलोग्राम गोबर की खाद, 950 से 1650 ग्राम यूरिया और 1375 से 2400 ग्राम सिंगल सुपर फासफेट प्रति वृक्ष डालें| 8 साल के पौधे को 90 से 100 किलोग्राम गोबर की खाद, 1950 ग्राम यूरिया और 2750 ग्राम सिंगल सुपर फासफेट प्रति वृक्ष डालें| गोबर की खाद की पूरी मात्रा दिसंबर के महीने में डालें, जबकि यूरिया को दो बराबर भागों में डालें|