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जब ऊधो यह बात कही। सूरदास।भ्रमरगीत सार • मधुकर ! कह कारे की जाति। सूरदास। भ्रमरगीत ... video। shorts।reel।kavya khand।hindi।vyakhya।surdas।bhramargeet। bhramargeet sar। ramchandra shukla। भजन।सूरदास। सूरदास के पद। भ्रमरगीत सार। vyakhya। explanation।surdas। / @pathshala2047 सूरदास का जीवन परिचय सूरदास कवि सूरदास के गुरु कौन थे सूरदास के भजन सूरदास के पद सूरदास किसके शिष्य सूरदास की प्रमुख रचनाएं सूरदास के निर्गुण सूरदास की दो रचनाएं सूरदास की किताबें सूरदास की रचनाएँ Surdas ka jivan Parichay Surdas ka janm sthan kahan hai सूरदास का जीवन परिचय सूरदास की भाषा शैली Surdas ke pita ka naam सूरदास भ्रमरगीत भ्रमरगीत सार व्याख्या सूरदास भ्रमरगीत सार सूरदास भ्रमरगीत सार रामचंद्र शुक्ल सूरदास का भ्रमरगीत सूरदास की दो रचनाएं Surdas ka janm sthan kahan hai सूरदास की किताबें सूरदास की भाषा शैली Surdas ka jivan Parichay Surdas ke pita ka naam जन्म 1478 ई. सीही - मृत्यु 1583 ई. पारसौली जन्म स्थान सीही #अष्टछाप के कवि पुष्टिमार्ग के कवि सूरदास के उपनाम: #पुष्टिमार्ग का जहाज’ विट्टलनाथ ‘भक्ति का समुंद्र’ वल्लभाचार्य और नाभादास ‘खंजन नयन’ अमृतलाल नागर #वात्सल्य रस का सम्राट’ एवं जीवनोत्सव का कवि’ आचार्य रामचंद्र शुक्ल ‘हिन्दी साहित्य के आकाश का सूर्य’ भिखारीदास भिखारीदास का दोहा।#सुर-सुर तुलसी शशि उड़गन केशवदास, अबके कवि खद्योत सम, जंह तंह करत प्रकाश।” जन्मांध मानने वाले विद्वान: ‘गोकुलनाथ, मिश्रबंधु, नाभादास, आचार्य रामचंद्र शुक्ल और डॉ राम विलास शर्मा। जन्म के बाद में अंधा मानने वाले विद्वान: आचार्य हजारी प्रसाद दिवेदी, डॉ नामवर सिंह, प्रियादास, मोतीलाल मेनारिया, नंददुलारे वाजपेयी #सूरसागर सुरसारावली साहित्यलहरी #Bhramargeet ramchandra shukl #bhramargeet sar bhramageet sar ramchandra shukla bhramageet sar ramchandra shukla saransh bhramageet sar ramchandra shukla prashn uttar #गोपी और उद्धव के संवाद। #भ्रमर गीत की व्याख्या। vyakhya bhramar geet ki likhit vyakhya hindi bhramar तब जदुपति अति ही सुख पायौ, मानी प्रकट सही ।। श्रीमुख कह्यौ जाह तुम ब्रज कौं, मिलह जाइ ब्रज लोग। मो बिन विरह भरीं ब्रजबाला, जाइ सुनावहु जोग ।। प्रेम मिटाइ ज्ञान परबोधहु, तुम हो पूरन ज्ञानी । सूर उपेंगसुत मन हरवाने, यह महिमा इन जानी ॥६- आ ।। शब्दार्थ प्रकट प्रत्यक्ष रूप से। सही ठीक, उचित । परबोधह - उपदेश दो। इन-कृष्ण ने । भावार्थ-उद्धव द्वारा ब्रह्म को ही एकमात्र सत्य घोषित किये जाने पर कृष्ण ने ऊपर से दिखाने के लिए उनकी बात को सही मान लिया। सूरदास इसी का वर्णन करते हुए कह रहे हैं कि- जब उद्धव ने कृष्ण से ब्रह्म सम्बन्धी यह बात (कि ब्रह्म ही एकमात्र सत्य है, अतः उसी से नाता रखना चाहिए) कही, तब यदुपति कृष्ण ने प्रत्यक्ष रूप में अर्थात् दिखाने के लिए उद्धव की इस बात को सही स्वीकार कर लिया और अत्यन्त सुख प्राप्त किया (मुखी होने का अभिनय किया)। इसके उपरान्त कृष्ण ने अपने श्रीमुख से उद्धव से कहा कि हे उद्धव ! तुम ब्रज को जाओ और वहाँ जाकर व्रज के लोगों से मिलो । मेरे बिना ब्रजबालाएँ विरह में व्याकुल हो रही होंगी, इसलिए तुम जाकर उन्हें योग-साधना करने की शिक्षा दो, और योग की शिक्षा द्वारा उनके हृदय से प्रेम की भावना को नष्ट कर, दूर कर, उनके हृदय में ज्ञान की ज्योति उत्पन्न कर उन्हें सान्त्वना प्रदान करो । तुम यह काम सरलतापूर्वक कर सकते हो, क्योंकि तुम पूर्ण ज्ञानी हो, ज्ञान-मार्ग में पारंगत हो । कृष्ण की बातें सुन उद्धव मन में अत्यन्त प्रसन्न हुए, यह सोचकर कि इन कृष्ण ने बम्ततः मेरे इस महत्त्व को अथवा ज्ञान के महत्त्व को जान लिया, स्वीकार कर लिया । विशेष - यहाँ कृष्ण उद्धव को उकसा रहे हैं और इस प्रकार उस भूमिका १० | भ्रमर गीत सार क। निर्माण कर रहे हैं, जिसका उपसंहार ज्ञान की पराजय और प्रेम की विजय के रूप में होने वाला है।