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Sant Malookdas Ji Vani, Malookdas Advait Poem, Sabhin Ke Hum Sabhi Hamare, Oneness Poem Hindi, Sant Poetry Meaning, Bhakti Poem Explanation, Ekta Mein Eshwar, Advait Philosophy Hindi, Sant Maluk Das Teachings, Ram Ravan Ekta Poem, Spiritual Hindi Poetry, Devotional Bhakti Song, Kabir Sant Parampara, Malookdas Ke Dohe, Ekta Par Kavita यह रचना संत मलूकदास जी की अमूल्य वाणी है, जिसमें उन्होंने सच्चे साधक के गुण, दया और धर्म का महत्व तथा सांसारिक अहंकार की नश्वरता को अत्यंत सरल और मार्मिक शब्दों में व्यक्त किया है। संत मलूकदास भक्ति आंदोलन के ऐसे संत थे जिन्होंने प्रेम, नम्रता और आत्मज्ञान को ही ईश्वर प्राप्ति का मार्ग बताया। उनकी वाणी लोकजीवन से जुड़ी हुई है, जिसमें गूढ़ आध्यात्मिक संदेश सहज भाषा में प्रस्तुत होता है। इस पद में वे बताते हैं कि सच्चा महान वही है जिसके भीतर दया और धर्म बसे हैं, जिसके वचन अमृत समान मधुर हैं और जिसकी दृष्टि विनम्र रहती है। MEANING OF POEM इस पद में संत मलूकदास जी मानव जीवन का सच्चा मूल्य समझाते हैं। वे कहते हैं कि दया और धर्म जिनके हृदय में बसते हैं, जिनकी वाणी अमृत के समान मीठी होती है और जिनकी दृष्टि सदैव नम्र रहती है — वही वास्तव में ऊँचे कहलाने योग्य हैं। वे यह भी कहते हैं कि जब मनुष्य सम्मान, महत्व, सत्य और बालसुलभ प्रेम का मोह छोड़ देता है, तभी वह सच्ची त्याग भावना को प्राप्त करता है। संत बताते हैं कि इस देह के जीवन पर गर्व करना व्यर्थ है — यह शरीर क्षणभंगुर है, जैसे रेत की दीवार एक हल्की सी हवा में ढह जाती है, वैसे ही यह देह भी नश्वर है। अंत में वे कहते हैं कि अजगर कुछ काम नहीं करता, पक्षी भी बिना श्रम के अपना जीवन यापन करते हैं — फिर मनुष्य को भी अति लोभ और चिंता छोड़कर परमात्मा पर भरोसा रखना चाहिए। “सबके दाता राम” — अर्थात सब कुछ ईश्वर के अधीन है, वही पालनकर्ता है। EXPLANATION पहले दो पंक्तियों में संत मलूकदास जी ने करुणा और धर्म को सर्वोच्च गुण बताया है। जिन लोगों में यह दोनों गुण हैं, वे वास्तव में ऊँचे हैं, चाहे उनका बाहरी पद या जाति कुछ भी हो। फिर वे बताते हैं कि जब मनुष्य "आदर, मान, महत्व और बालपन का नेह" छोड़ देता है, तब वह अहंकार से मुक्त होकर सच्चे अर्थों में त्यागी बनता है। तीसरी चौपाई में वे देहाभिमान की नश्वरता को उजागर करते हैं — शरीर की स्थिरता पर गर्व करना मूर्खता है, क्योंकि यह पलभर में मिट सकता है। अंतिम दोहों में वे सहज जीवन का संदेश देते हैं। जैसे अजगर बिना प्रयास के जीवन बिताता है और पक्षी भी बिना परिश्रम के अपना आहार पा लेते हैं, वैसे ही साधक को भी ईश्वर पर विश्वास रखना चाहिए। अंत में वे कहते हैं — सबके दाता केवल राम हैं, मनुष्य को चिंता और लालच से मुक्त रहकर भक्ति में लीन रहना चाहिए। MEANING OF COMPLEX WORDS अमरित बैन: मीठे, जीवनदायी वचन नैन नीचे रखना: विनम्रता का प्रतीक बालापन को नेहु: बाल्यकाल का भोला स्नेह या आसक्ति देह की प्रीत: शरीर के प्रति मोह या अहंकार बालू की सी भीत: रेत की दीवार — अर्थात अस्थिर और नाशवान अजगर: साँप की प्रजाति जो बिना श्रम के भोजन पाता है चाकरी: नौकरी या श्रम गाफिल: असावधान, बेपरवाह दाता राम: सर्वदाता परमात्मा, जो सबका पालन करता है यह वाणी मनुष्य को सरल जीवन, विनम्र आचरण और ईश्वर पर पूर्ण विश्वास रखने की प्रेरणा देती है। संत मलूकदास जी का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है — जो दया, धर्म और भक्ति में रमे हैं, वही वास्तव में ऊँचे हैं। संत मलूकदास परिचय संत मलूकदास जी 17वीं शताब्दी के प्रसिद्ध भक्त, कवि और संत थे। इनका जन्म प्रयागराज के निकट कड़ा नामक स्थान पर हुआ था। वे भक्ति आंदोलन के प्रमुख संतों में से एक थे और प्रेम, भक्ति, विनम्रता तथा आत्मज्ञान के उपदेश देते थे। उन्होंने जाति-पाति, आडंबर और दिखावे का विरोध किया और कहा कि सच्चा धर्म ईश्वर के नाम का स्मरण और हृदय की पवित्रता में है। उनकी रचनाएँ “मलूक वाणी” के नाम से प्रसिद्ध हैं, जिनमें गहरी आध्यात्मिक शिक्षा और जीवन का सार मिलता है। संत मलूकदास जी का संदेश था — ईश्वर हर हृदय में है, और उसे पाने का मार्ग भक्ति, दया और नम्रता से होकर जाता है। - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - - MORE VIDEOS • Na Vah Reejhai Jap Tap Keenhe | Sant Maluk... • Unlocking the Secrets of Malukdas: Raam Ka... • Kaun Milaave Jogiya | Malukdas | Devotiona... MORE PLAYLISTS • मलूकदास जी की वाणी • Bhakti Ke Rang • Prem Aur Bhakti Ke Bhajan • Gyaan Aur Vichar Ke Geet