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वैदिक संस्कृति और दर्शन भारतीय सभ्यता के सबसे पुराने और आधारभूत स्तंभ हैं, जिनकी जड़ें वेदों, वेदांत और योग में निहित हैं। लगभग 1500 ईसा पूर्व से 600 ईसा पूर्व के बीच विकसित यह संस्कृति ज्ञान, धर्म, और आध्यात्मिकता का एक अनूठा संगम है, जिसने भारतीय दर्शन (Indian Philosophy) की नींव रखी है। वैदिक संस्कृति और दर्शन के मुख्य बिंदु: 1. प्राचीनतम ग्रंथ: वेद (Vedas) वेद प्राचीन भारतीय संस्कृति के पवित्र और सबसे पुराने साहित्यिक स्रोत हैं। यह चार हैं: ऋग्वेद: सबसे प्राचीन वेद, जो देवताओं की स्तुति में मंत्रों का संग्रह है। सामवेद: ऋग्वेद के मंत्रों का संगीतमय रूप। यजुर्वेद: यज्ञों और कर्मकांडों के लिए विधियों और मंत्रों का संग्रह। अथर्ववेद: तंत्र-मंत्र, रोग निवारण और लौकिक विषयों से संबंधित। वेदों को श्रुति कहा जाता है, जिसका अर्थ है 'सुना हुआ'। 2. वैदिक दर्शन और वेदांत (Vedanta) वेदांत का अर्थ है 'वेदों का अंत' या वेदों का सार (उपनिषद, ब्रह्मसूत्र और भगवद्गीता)। दार्शनिक आधार: उपनिषदों में ब्रह्म (परमेश्वर) और आत्मा (आत्मन) के संबंध पर चर्चा की गई है, जो इस बात पर जोर देते हैं कि जीव और ब्रह्म वास्तव में एक ही हैं (अद्वैत)। ज्ञान का महत्व: वेदांत मानता है कि सच्चा ज्ञान ही मुक्ति (मोक्ष) का एकमात्र मार्ग है, जो कर्मकांडों से ऊपर है। सर्वेश्वरवाद (Pantheism): उपनिषद स्थापित करते हैं कि सृष्टि का हर कण-कण ईश्वर व्याप्त है। 3. योग दर्शन (Yoga Philosophy) योग भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न अंग है, जो केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक नियंत्रण का मार्ग है। मूल: वेदों में भी योग (जैसे ध्यान और आत्म-दर्शन) का उल्लेख है। महर्षि पतंजलि: उन्होंने 'योग सूत्र' में योग को व्यवस्थित रूप दिया, जिसे अष्टांग योग (यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि) के रूप में जाना जाता है। उद्देश्य: योग का अंतिम उद्देश्य चित्त (मन) की वृत्तियों का निरोध करना और मोक्ष प्राप्त करना है। 4. वैदिक संस्कृति की प्रमुख विशेषताएं यज्ञ और कर्मकांड: वैदिक जीवन में यज्ञों का अत्यधिक महत्व था, जो देवताओं को प्रसन्न करने और सामंजस्य स्थापित करने के लिए किए जाते थे। वर्णाश्रम व्यवस्था: समाज चार वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र) और चार आश्रमों (ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, संन्यास) में विभाजित था। संस्कृत भाषा: वेदों की रचना संस्कृत भाषा में हुई है, जो इस संस्कृति की मुख्य भाषा थी। ऋत (Rta): वैदिक दर्शन में ब्रह्मांडीय व्यवस्था (Cosmic Order) 'ऋत' को प्रमुख माना गया है, जो प्रकृति और मानव आचरण को नियंत्रित करता है। निष्कर्ष: वेद, वेदांत और योग ने भारतीय विचार परंपरा को केवल धार्मिकता से ऊपर उठाकर आत्म-अनुभव, तर्क और ज्ञान (ज्ञानयोग) का मार्ग दिखाया है, जो आज भी प्रासंगिक है।