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पकड़ा गया मोहित–मीरा का गंदा खेल आर्यवर्धन के सबूत से खुली पूरी साजिश | तुम से तुम तक | Amit Rajput दोस्तों आज के इस महाएपिसोड में आप देखेंगे कि कैसे डॉक्टर मोहित और मीरा की काली करतूतों का घड़ा अब फूटने वाला है और सीरियल तुमसे तुम तक की कहानी में एक ऐसा भूचाल आने वाला है जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की होगी कहानी की शुरुआत उस खौफनाक मंजर से होती है जहाँ आर्यवर्धन और झेंडे के हाथ एक ऐसा सबूत लगता है जिससे मीरा और मोहित का असली और बदसूरत चेहरा सबके सामने बेनकाब हो जाता है डॉक्टर मोहित जो अब तक शरीफ होने का ढोंग कर रहा था वह असल में मीरा का सिर्फ एक मोहरा निकला जिसे अनु और आर्यवर्धन के पवित्र रिश्ते में आग लगाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था मीरा की नफरत इस कदर बढ़ चुकी थी कि उसने मोहित को मोटी रकम देकर अनु की जिंदगी बर्बाद करने की पूरी प्लानिंग कर ली थी कहानी में नया मोड़ तब आता है जब मोहित की माँ अनु और पुष्पा शर्मा जी को अपने घर खाने पर बुलाती हैं ताकि शादी की बात आगे बढ़ाई जा सके लेकिन इसी बीच मौका पाकर मीरा मोहित को फ़ोन करती है और उसे वह पैसों से भरा बैग थमाती है जो उनके इस घटिया समझौते का हिस्सा था मोहित पैसों के लालच में इतना अंधा हो चुका है कि उसे अपने पेशे की गरिमा का भी ख्याल नहीं रहा लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था क्योंकि ठीक उसी वक्त झेंडे और आर्यवर्धन वहां मौजूद होते हैं और वे अपनी आँखों से मीरा को मोहित को पैसे देते हुए देख लेते हैं यह मंजर देखकर आर्यवर्धन का खून खौल उठता है और उसे समझ आ जाता है कि अनु एक बहुत बड़ी मुसीबत में फँसने वाली है आर्यवर्धन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह अनु के परिवार को यह सच कैसे समझाए क्योंकि पिछले कुछ हादसों की वजह से उसका अनु के घर जाना पूरी तरह से वर्जित हो चुका है अगर वह वहां जाता है तो उसे अपमानित होना पड़ेगा लेकिन अपने प्यार की खातिर वह हर बेइज्जती सहने को तैयार है तभी कहानी में चमत्कार की तरह सिद्धि माता का आगमन होता है जो अनु को कड़ी चेतावनी देती हैं कि वह गलत रास्ते पर चल रही है और उसने जो फैसला लिया है वह उसके विनाश का कारण बन सकता है सिद्धि माता अनु को अहसास कराती हैं कि उसका सच्चा रक्षक और हमसफ़र सिर्फ आर्यवर्धन ही है माता रानी की प्रेरणा से अनु के मन में भी शक का बीज पनपने लगता है और वह पहली बार अपने माता पिता के साथ मिलकर मोहित के अतीत की छानबीन करने का फैसला करती है जब वे मोहित के अस्पताल और उसके पुराने रिकॉर्ड्स खंगालते हैं तो एक ऐसा सच बाहर आता है जिससे पूरे शर्मा परिवार के पैरों तले जमीन खिसक जाती है उन्हें पता चलता है कि डॉक्टर मोहित न केवल एक फ्रॉड है बल्कि वह पहले से शादीशुदा भी है और अपनी पत्नी को धोखा देकर अनु से दूसरी शादी करने की फिराक में था अपनी बेटी की जिंदगी को तबाही से बचाने के लिए शर्मा जी और पुष्पा जी तुरंत आर्यवर्धन के पास भागते हैं और हाथ जोड़कर अपनी गलतियों की माफ़ी मांगते हैं शर्मा जी जब अपनी बेटी का हाथ आर्यवर्धन के हाथों में सौंपने की बात करते हैं तो आर्यवर्धन भावुक हो जाता है और इस तरह साज़िशों का अंत होकर अनु और आर्यवर्धन के मिलन की नई शुरुआत होती है