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रासो साहित्य : MCQ / Exam Point • रासो साहित्य हिंदी साहित्य के आदिकाल से संबंधित है। • रासो काव्य को वीरगाथात्मक काव्य कहा जाता है। • रासो साहित्य का मुख्य रस वीर रस है। • रासो साहित्य की रचना चारण और भाट कवियों द्वारा की गई। • रासो काव्य का प्रमुख उद्देश्य राजाओं और वीर नायकों की वीरता का गुणगान है। • रासो साहित्य में युद्ध, शौर्य, पराक्रम और बलिदान का वर्णन मिलता है। • रासो साहित्य की भाषा अपभ्रंश, पुरानी हिंदी और राजस्थानी मिश्रित है। • रासो साहित्य की शैली ओजपूर्ण और कथात्मक है। • रासो साहित्य में अतिशयोक्ति और लोककथात्मक तत्व पाए जाते हैं। • रासो काव्य प्रायः राजदरबारों में गाया-पढ़ा जाता था। प्रमुख रासो ग्रंथ व रचनाकार • पृथ्वीराज रासो — चंदबरदाई • खुमाण रासो — दलपत विजय • बीसलदेव रासो — नरपति नाल्ह • हम्मीर रासो — नायक कवि परीक्षा में बार-बार पूछे जाने वाले तथ्य • रासो साहित्य का सर्वाधिक प्रसिद्ध ग्रंथ — पृथ्वीराज रासो • पृथ्वीराज रासो के कवि — चंदबरदाई • रासो साहित्य का प्रमुख काव्य रूप — वीरगाथा • रासो साहित्य का प्रमुख क्षेत्र — राजस्थान • रासो साहित्य का ऐतिहासिक महत्व — राजपूत कालीन इतिहास का काव्यात्मक चित्रण