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भारत में महिला शिक्षा का इतिहास सिर्फ कुछ प्रसिद्ध नामों तक सीमित नहीं है। इसके पीछे ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने बिना किसी पहचान, बिना किसी प्रशंसा के एक पूरी क्रांति की नींव रख दी। यह कहानी है सिंथिया फैरर की — एक विदेशी महिला, जो उन्नीसवीं शताब्दी में भारत आईं और भारतीय बेटियों की शिक्षा को अपना जीवन समर्पित कर दिया। अहमदनगर के छोटे से विद्यालय से शुरू हुई यह यात्रा आगे चलकर सावित्रीबाई फुले और महात्मा ज्योतिबा फुले जैसे महान समाज सुधारकों की प्रेरणा बनी। आज जब हम सावित्रीबाई फुले को भारत की पहली महिला शिक्षिका कहते हैं, तो यह जानना भी ज़रूरी है कि उस ऐतिहासिक यात्रा के पीछे एक भूला-बिसरा नाम भी खड़ा था। यह वीडियो उसी अनकही कहानी को सम्मान और स्मृति के साथ आपके सामने लाने का प्रयास है। 📖 कुछ लोग इतिहास नहीं बनाते… वे इतिहास की नींव रखते हैं। 🙏 अगर यह वीडियो आपको उपयोगी लगे तो Like करें, Share करें और ऐसी ही कहानियों के लिए Channel को Subscribe करें। Thank You ❤️ #CynthiaFarrar #savitribaiphule #jyotibaphule #WomenEducationInIndia #indianhistory #forgottenheroes #womenempowerment #socialreformers #IndianEducationHistory #inspiringstories #historicaldocumentary #BharatKiBetiyan #unsungheroes #hamarasamaj