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शनिवार विशेष- श्री शनि चालीसा l Shri Shani Chaisha | Atoot Bhakti Atoot Shakti श्री शनि चालीसा का पाठ भक्तों के जीवन में अनुशासन, धैर्य और न्याय की भावना को मजबूत करता है। शनिदेव को कर्मफलदाता कहा गया है, जो प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। ऐसा माना जाता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक श्री शनि चालीसा का पाठ करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव शांत होते हैं तथा जीवन में स्थिरता आती है। शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित है। इस दिन शनि चालीसा का पाठ करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मन को शांति प्राप्त होती है। जो भक्त सत्य, परिश्रम और संयम के मार्ग पर चलते हैं, उन पर शनिदेव विशेष कृपा करते हैं। शनि चालीसा हमें यह सिखाती है कि कठिन समय भी हमें मजबूत और आत्मनिर्भर बनाता है। Atoot Bhakti Atoot Shakti के भाव के साथ जब हम श्री शनि चालीसा का स्मरण करते हैं, तो भक्ति के साथ आत्मबल भी बढ़ता है। नियमित पाठ से जीवन में बाधाएँ कम होती हैं, निर्णय क्षमता सुधरती है और कर्मों के प्रति जागरूकता आती है। शनिदेव की आराधना से भय नहीं, बल्कि साहस, न्याय और संतुलन की शक्ति प्राप्त होती है। इस शनिवार श्रद्धा से शनि चालीसा का पाठ करें और शनिदेव की कृपा अनुभव करें। ------- जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल करण कृपाल। दीनन के दुख दूर करि, कीजै नाथ निहाल॥ जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज। करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥ जयति जयति शनिदेव दयाला। करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥ चारि भुजा, तनु श्याम विराजै। माथे रतन मुकुट छबि छाजै॥ परम विशाल मनोहर भाला। टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥ कुण्डल श्रवण चमाचम चमके। हिय माल मुक्तन मणि दमके॥ कर में गदा त्रिशूल कुठारा। पल बिच करैं अरिहिं संहारा॥ पिंगल, कृष्णो, छाया नन्दन। यम, कोणस्थ, रौद्र, दुखभंजन॥ सौरी, मन्द, शनी, दश नामा। भानु पुत्र पूजहिं सब कामा॥ जा पर प्रभु प्रसन्न ह्वैं जाहीं। रंकहुँ राव करैं क्षण माहीं॥ पर्वतहू तृण होई निहारत। तृणहू को पर्वत करि डारत॥ राज मिलत बन रामहिं दीन्हयो। कैकेइहुँ की मति हरि लीन्हयो॥ बनहूँ में मृग कपट दिखाई। मातु जानकी गई चुराई॥ लखनहिं शक्ति विकल करिडारा। मचिगा दल में हाहाकारा॥ रावण की गति-मति बौराई। रामचंद्र सों बैर बढ़ाई॥ दियो कीट करि कंचन लंका। बजि बजरंग बीर की डंका॥ नृप विक्रम पर तुहि पगु धारा। चित्र मयूर निगलि गै हारा॥ हार नौलखा लाग्यो चोरी। हाथ पैर डरवायो तोरी॥ भारी दशा निकृष्ट दिखायो। तेलिहिं घर कोल्हू चलवायो॥ विनय राग दीपक महं कीन्हयों। तब प्रसन्न प्रभु ह्वै सुख दीन्हयों॥ हरिश्चन्द्र नृप नारि बिकानी। आपहुं भरे डोम घर पानी॥ तैसे नल पर दशा सिरानी। भूंजी-मीन कूद गई पानी॥ श्री शंकरहिं गह्यो जब जाई। पारवती को सती कराई॥ तनिक विलोकत ही करि रीसा। नभ उड़ि गयो गौरिसुत सीसा॥ पांडव पर भै दशा तुम्हारी। बची द्रौपदी होति उघारी॥ कौरव के भी गति मति मारयो। युद्ध महाभारत करि डारयो॥ रवि कहं मुख महं धरि तत्काला। लेकर कूदि परयो पाताला॥ शेष देव-लखि विनती लाई। रवि को मुख ते दियो छुड़ाई॥ वाहन प्रभु के सात सुजाना। जग दिग्गज गर्दभ मृग स्वाना॥ जंबुक सिंह आदि नख धारी। सो फल ज्योतिष कहत पुकारी॥ गज वाहन लक्ष्मी गृह आवैं। हय ते सुख सम्पति उपजावैं॥ गर्दभ हानि करै बहु काजा। सिंह सिद्धकर राज समाजा॥ जम्बुक बुद्धि नष्ट कर डारै। मृग दे कष्ट प्राण संहारै॥ जब आवहिं प्रभु स्वान सवारी। चोरी आदि होय डर भारी॥ तैसहि चारि चरण यह नामा। स्वर्ण लौह चांदी अरु तामा॥ लौह चरण पर जब प्रभु आवैं। धन जन सम्पत्ति नष्ट करावैं॥ समता ताम्र रजत शुभकारी। स्वर्ण सर्व सर्व सुख मंगल भारी॥ जो यह शनि चरित्र नित गावै। कबहुं न दशा निकृष्ट सतावै॥ अद्भुत नाथ दिखावैं लीला। करैं शत्रु के नशि बलि ढीला॥ जो पंडित सुयोग्य बुलवाई। विधिवत शनि ग्रह शांति कराई॥ पीपल जल शनि दिवस चढ़ावत। दीप दान दै बहु सुख पावत॥ कहत राम सुन्दर प्रभु दासा। शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा॥ ----- #शनिवार_विशेष #श्री_शनि_चालीसा #ShriShaniChalisa #ShaniDev #शनिदेव_कृपा #ShaniBhakti #AtootBhaktiAtootShakti #शनि_भक्ति #शनिवार_भक्ति #shanimaharajstatus ----- @TSeriesBhaktiSagar @bhajanindia @SaregamaBhakti ---- Copyright Disclaimer: - Under section 107 of the copyright Act 1976, allowance is mad for FAIR USE for purpose such a as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship and research. Fair use is a use permitted by copyright statues that might otherwise be infringing. Non- Profit, educational or personal use tips the balance in favor of FAIR USE.