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#पाओगे भीतर अपना बचपन #हिंदी कविता#children’s day#MotivationalPoetry hindi#HindiPoetry #Inspiration #HindiKavita #Motivation #PoetryOfLife #सुविचार#Ek kavita @काव्यकृतिका पाओगे भीतर अपना बचपन👧🏻 कभी ढूँढो तो पाओगे जी रहा तुममें अब भी बचपन विरला ही होगा कोई याद न रखा हो जन्मदिन अपना सच कहना, मचलता न होगा तोहफ़ों के लिए मन जब थका जाती जीवन की दौड़ और हावी होता भारीपन न चाहोगे माँ सा स्नेह हौले से पुचकार व आलिंगन भाई बहनों संग हँसी ठिठोली समय का पहिया घुम जाता उम्र सयानी हो रही पर, बार-बार लौट आता है बचपन बहती सरिता देख यदि जी करे अंजुली भर जल पीने को पल भर रुक जाने को चिड़ियों को देख चहचहाते बेर, जामुन से लदे पेड़ों पर मन कहे एक पत्थर तो मारूँ तब समझो भीतर तुम्हारे जी रहा अब भी बचपन न खोने देना मासूम, सच्चे उस मन के बच्चे को झूठे अहंकार, ईर्ष्या, लोभ से पनप रहे कितने अनबन सच्ची मुस्कान, सादा जीवन, विकसित हो प्रेम भाव नज़र चुराकर ही सही, जीते रहें हम अपना बचपन संचिता