У нас вы можете посмотреть бесплатно उद्धार (Uddhar): दहेज, समाज और त्याग की मार्मिक कहानी | Munshi Premchand Audio Story или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
#उद्धार #MunshiPremchand #PremchandStories मुंशी प्रेमचंद द्वारा रचित कहानी “उद्धार” भारतीय समाज में फैली दहेज प्रथा, विवाह की सामाजिक मजबूरियों और मानवीय त्याग की एक मार्मिक दास्तान है। यह कहानी उन सैकड़ों परिवारों की व्यथा को उजागर करती है जिनकी बेटियाँ केवल दहेज के अभिशाप के कारण बोझ समझी जाती हैं। प्रेमचंद समाज के उस कड़वे सत्य पर प्रहार करते हैं जिसमें लड़की का जन्म दुःख का कारण माना जाता है और विवाह एक ऐसा भार बन जाता है जिसे उठाने के लिए माता-पिता जीवन भर संघर्ष करते हैं। कहानी की शुरुआत होती है मुंशी गुलजारीलाल से, जो एक सज्जन, उदार और मध्यमवर्गीय व्यक्ति हैं। उनकी पहली संतान एक बेटी है, जिसका विवाह उनके लिए एक विशाल चुनौती बन जाता है। लड़का मिलता है—हजारीलाल—परंतु वह विवाह के लिए राज़ी नहीं। कारण पूछने पर वह बताता है कि वह क्षय रोग (टीबी) से पीड़ित है और कुछ ही दिनों का मेहमान है। वह नहीं चाहता कि उसकी बीमारी किसी निर्दोष लड़की की जिंदगी को तबाह कर दे। लेकिन समाज, परंपरा और शंकाओं से भरे लोग उसकी बात पर विश्वास नहीं करते। माता-पिता इसे “हीला-हवाला” समझते हैं और विवाह करने पर जोर देते हैं। हजारीलाल अपने संघर्ष, हृदय पीड़ा और आंतरिक द्वंद्व से टूट चुका है। एक ओर कर्तव्य का भार, दूसरी ओर किसी युवती का भविष्य संकट में डालने का अपराध-बोध। विवाह की तैयारियाँ शुरू हो जाती हैं और हजारीलाल अंततः एक निर्णायक कदम उठाता है—वह अपनी जान दे देता है, ताकि एक निर्दोष लड़की की जिंदगी बर्बाद न हो। उसका यह त्याग न केवल जीवन का बलिदान है, बल्कि समाज के दहेज-ग्रस्त और अंधी परंपराओं के विरुद्ध एक मौन विद्रोह भी है। कुछ समय बाद वह लड़की—अम्बा—अपने सौभाग्यपूर्ण जीवन के बीच जब तीज के अवसर पर मायके से भेजी गई पिटारी प्राप्त करती है, तो उसके पति द्वारा बताया गया कि यह उसके चाचा दरबारीलाल ने भेजी है। पिटारी में हजारीलाल का नाम देखकर अम्बा की आंखें भर आती हैं। वह समझ जाती है कि आज उसका जो सौभाग्य है, वह उस युवक के बलिदान का फल है। मुंशी प्रेमचंद इस कहानी के माध्यम से बताते हैं कि सच्चा “उद्धार” क्या होता है—अपनी खुशी के लिए नहीं, बल्कि किसी और की जिंदगी बचाने के लिए स्वयं को समर्पित कर देना। यह कहानी समाज, मानवता और त्याग का अनमोल संदेश देती है। Mico FM द्वारा प्रस्तुत यह ऑडियो पॉडकास्ट आपको प्रेमचंद की लेखनी की गहराई, संवेदना और सामाजिक चेतना का अद्भुत अनुभव कराएगा। #HindiKahani #AudioPodcast #MicoFM #DahejPratha #HindiAudiobook #StoryPodcast #MoralStories 🌟 Follow us on Social Media Facebook: https://www.facebook.com/profile.php?... Instagram: / micofmofficial 📺 Subscribe for More: / @micofmweb