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कुलदेवी : अपने आप ढूंढ लेगी आपको : कब ,कैसे और क्यों आजकल लोग कुलदेवी/देवता तथा कुल परंपरा से दूर होते जा रहे हैं,कई को मालूम ही नहीं कि उनकी कुलदेवी कौनसी है. **************************** कुलदेवी स्तोत्रम् (Kuladevi Stotram) ॥ श्री कुलदेवी स्तोत्रम् ॥ या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥१॥ कुलस्य रक्षिणी देवी कुलं संजीवयिष्यसि । त्वमेव सर्वदा मां च पुत्रपौत्रसमन्वितम् ॥२॥ धर्मार्थकाममोक्षाणां दात्री त्वं परमेश्वरी । कुलदेवि प्रसीद त्वं सर्वसिद्धिप्रदायिनि ॥३॥ दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः । स्वस्थैः स्मृता मतिमतीं ददासी शुभां ॥४॥ तुष्टा भव त्वमे देवि सर्वकामप्रदायिनि । कुलं मे रक्ष सर्वत्र भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि ॥५॥ या देवी करुणारूपा सर्वलोकनमस्कृता । त्वमेव कुलदेवीनां नित्यं सन्निहिता शुभा ॥६॥ ॥ इति श्री कुलदेवी स्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥ 📿 पाठ विधि (पारंपरिक नियम) दिन – मंगलवार, शुक्रवार या नवमी तिथि को सर्वोत्तम। स्थान – घर के पूजास्थान या कुलदेवी के मंदिर में। सामग्री – लाल या पीले पुष्प, दीपक, धूप, प्रसाद (गुड़, नारियल या खीर)। विधि – पहले गणपति, फिर कुलदेवी का ध्यान करें। “ॐ कुलदेव्यै नमः” मंत्र से 108 बार जप करें। तत्पश्चात यह स्तोत्र श्रद्धा से पाठ करें। अंत में आरती और परिवार की मंगलकामना करें। * जो व्यक्ति श्रद्धा से “कुलदेवी स्तोत्र” का पाठ करता है, उसके कुल में शांति, समृद्धि, सन्तान-सुख, और आरोग्य की वृद्धि होती है। संकट, भय और ग्रहदोषों का निवारण भी होता है। ************************* Amar Singh Chouhan Astrologer 9461504201 #Amar_Astrology #कुलदेवी #कुल l_देवी #कुल_परम्परा #कुलदेवी_स्त्रोत #कुलदेवी_पूजा #कुलदेवी_ स्वप्न_ आयेगी